>भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी पर पीथमपुर के नागरिकों ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को भस्म करने के बाद बची करीब 900 टन राख को किसी अन्य स्थान पर ले जाकर निस्तारित करने की मांग दोहराई।
>अधिकारियों के अनुसार यह राख पीथमपुर स्थित एक औद्योगिक संयंत्र के लीक-प्रूफ शेड में सुरक्षित रखी गई है। इस वर्ष जुलाई में 337 टन विषैले अपशिष्ट, 19 टन संदूषित मिट्टी और 2.2 टन पैकेजिंग सामग्री सहित कुल 358 टन कचरे को चरणबद्ध तरीके से भस्म किया गया था। राज्य सरकार द्वारा इस राख को संयंत्र परिसर में निर्माणाधीन लैंडफिल सेल में डालने की योजना पर स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि दुर्घटना की स्थिति में यह मानव आबादी और पर्यावरण के लिए खतरा बन सकती है।
>तारपुरा गांव के निवासी प्रकाश सर्कटे ने कहा कि संयंत्र से नजदीकी की वजह से लोग चिंतित हैं और राख को दूसरे स्थान पर ले जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं निर्मला पंवार ने दावा किया कि गांव में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं और स्थानीय जलस्रोतों की गुणवत्ता पर सवाल हैं।
>मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की निगरानी में है। अदालत ने अक्टूबर में लैंडफिल सेल में निस्तारण के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि स्थल मानव आबादी के अत्यंत निकट है और राख में पारे का स्तर सीमा से अधिक पाया गया। अदालत ने राज्य सरकार से वैकल्पिक स्थलों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सुरक्षित स्थल पर निस्तारण की मांग की है।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें