इमेज सोर्स उत्तरी रेलवे
भारत में रेल परिवहन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी शुरुआत होने जा रही है। देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के जल्द ही जींद-सोनीपत रेलखंड पर संचालन शुरू होने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड से हाल ही में मंजूरी मिलने के बाद परियोजना ने महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। शुक्रवार को शकूरबस्ती डिपो में ट्रेन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया गया। यह दस डिब्बों वाली स्वदेशी ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में प्रदूषणकारी गैसों के बजाय केवल जल-वाष्प उत्सर्जित होती है।
भारतीय रेल ने इस परियोजना को स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में विकसित किया है। इसके लिए हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड को पायलट रूट चुना गया है। परियोजना के तहत जींद में हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की स्वदेशी सुविधा भी विकसित की गई है। इससे ट्रेन के नियमित संचालन और ईंधन आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली पैदा होती है, जिससे ट्रेन के मोटर संचालित होते हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। प्रक्रिया के बाद केवल जल-वाष्प निकलती है, जिससे इसे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प माना जाता है।
रेलवे ने इस परियोजना में सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव और आग की संभावना का पता लगाने के लिए विशेष सेंसर लगाए गए हैं। इन सेंसरों की नियमित जांच की जाएगी। इसके अलावा शकूरबस्ती डिपो में ट्रेन के रखरखाव के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में संचालन के दौरान प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की टीम भी ट्रेन के साथ मौजूद रहेगी ताकि किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रेल मंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेल को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल तेजी से शत-प्रतिशत विद्युतीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है और यह प्रयास देश को नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य तक पहुंचाने में योगदान देगा। कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री ने पौधारोपण भी किया और रेल कर्मियों से संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के निर्देश भी दिए।
रेल मंत्री ने तिलक ब्रिज से शकूरबस्ती रेलखंड तक निरीक्षण किया। इस दौरान उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, दिल्ली मंडल के रेल प्रबंधक तथा रेलवे बोर्ड और उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की गई।
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