भारतीय जनता पार्टी ने मिशन 2027 की तैयारियों के बीच पश्चिम उत्तर प्रदेश की नई क्षेत्रीय टीम घोषित की है। क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर की ओर से घोषित कार्यकारिणी में जिलों के प्रतिनिधित्व के साथ सामाजिक समीकरण को भी ध्यान में रखा गया है। नई टीम में मेरठ को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। मेरठ से कुल आठ लोगों को क्षेत्रीय टीम में जगह दी गई है।
गौतमबुद्ध नगर यानी नोएडा को पिछली टीम की तरह इस बार भी तीन पद मिले हैं। इनमें एक उपाध्यक्ष, एक महामंत्री और एक कार्यकारिणी सदस्य शामिल हैं। वहीं गाजियाबाद और हापुड़ के प्रतिनिधित्व में पिछली टीम की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर शामली, बागपत, संभल और अमरोहा समेत कुछ जिलों को नई क्षेत्रीय टीम में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
नई क्षेत्रीय कार्यकारिणी में मेरठ सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला जिला रहा है। जिले से आठ लोगों को टीम में शामिल किया गया है। इसके बाद मुजफ्फरनगर के साथ गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ को भी संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान मिला है। नई टीम में जिलावार प्रतिनिधित्व का बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल संगठनात्मक तैयारियों पर जोर दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा की पश्चिम यूपी टीम में पदों के वितरण के दौरान क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।
यह खबर भी पढ़े - दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन विश्वास: 1,920 चोरी-गुम मोबाइल बरामद, कीमत 2 करोड़ से अधिक
गौतमबुद्ध नगर को नई टीम में तीन पद मिले हैं। यह संख्या पिछली क्षेत्रीय टीम के बराबर है। पिछली टीम में हरीश ठाकुर महामंत्री, बिजेंद्र नागर और आशीष वत्स मंत्री थे।नई कार्यकारिणी में विनोद त्यागी को उपाध्यक्ष बनाया गया है। हरीश ठाकुर को एक बार फिर महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है, जबकि राजे कसाना को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। इस तरह गौतमबुद्ध नगर से एक उपाध्यक्ष, एक महामंत्री और एक कार्यकारिणी सदस्य को क्षेत्रीय संगठन में जगह मिली है। नोएडा को पश्चिम उत्तर प्रदेश की भाजपा संगठनात्मक टीम में पहले की तरह तीन पद मिलना जिले के प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल है।
नई टीम में गाजियाबाद और हापुड़ को पिछली कार्यकारिणी की तुलना में अधिक प्रतिनिधित्व मिला है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों जिलों से इस बार एक-एक अतिरिक्त पदाधिकारी को शामिल किया गया है। गाजियाबाद से पिछली टीम में दो पदाधिकारी थे। नई टीम में यह संख्या बढ़कर तीन हो गई है। मान सिंह गोस्वामी को फिर से उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा अशोक मोगा को महामंत्री और कुमुदिनी सैनी को क्षेत्रीय मंत्री बनाया गया है। हापुड़ से पिछली टीम में विकास अग्रवाल महामंत्री थे। नई टीम में प्रवीण मित्तल को उपाध्यक्ष और ललित मोदी को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है। इस प्रकार जिले को दो पद मिले हैं।
यह खबर भी पढ़े - जाह्नवी कपूर की पहचान के दुरुपयोग पर HC की नजर, 6,884 यूआरएल का मामला
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 71 विधानसभा सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें एनसीआर क्षेत्र की सीटें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल मानी जाती हैं। संगठन के सामने शहरी मतदाताओं के साथ बूथ स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत रखने की चुनौती भी रहती है। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ जैसे जिलों को नई टीम में मिले प्रतिनिधित्व को इसी संगठनात्मक संदर्भ में देखा जा रहा है। इन जिलों में क्षेत्रीय टीम के पदाधिकारियों की मौजूदगी से पार्टी के जिला और क्षेत्रीय संगठन के बीच समन्वय की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, नई कार्यकारिणी में सभी जिलों को स्थान नहीं मिला है। शामली, बागपत, संभल और अमरोहा समेत कुछ जिलों के नाम उपलब्ध सूची में प्रतिनिधित्व पाने वाले जिलों में शामिल नहीं हैं।
नई क्षेत्रीय टीम के गठन में जिलों के साथ जातीय समीकरण को लेकर भी चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और महामंत्री पदों पर ब्राह्मण चेहरे को जगह नहीं मिली है। नोएडा से एक नेता को क्षेत्रीय महामंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उनके नाम पर पहले सहमति बनी थी, लेकिन अंतिम समय में नाम सूची से हटा दिया गया। इसी तरह एक अन्य ब्राह्मण नेता को भी क्षेत्रीय टीम में शामिल किए जाने की चर्चा थी, लेकिन उनका नाम अंतिम सूची में नहीं आया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
यह खबर भी पढ़े - जेन-जी आंदोलन के बाद पहली बार छात्रों के बीच पीएम मोदी, एसआरसीसी में करेंगे संवाद
नई टीम में शामिल कुछ पदाधिकारियों को लेकर विवाद की चर्चा भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक महामंत्री पर कुछ समय पहले महिला शोषण के आरोप लगाए गए थे। दी गई जानकारी के मुताबिक यह मामला अब समाप्त हो चुका है। इसके अलावा एक पदाधिकारी पर कुछ वर्ष पहले पैसे लेकर पद दिलाने के आरोप लगाए जाने की बात कही गई है। एक अन्य पदाधिकारी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप बताए गए हैं। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध सामग्री में संबंधित व्यक्तियों का पक्ष, आरोपों की कानूनी स्थिति या किसी न्यायिक निष्कर्ष का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गौतमबुद्ध नगर में पदों की संख्या में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन पदों पर जिम्मेदारियों का स्वरूप बदला है। पिछली टीम में जिले से एक महामंत्री और दो मंत्री थे। नई टीम में एक उपाध्यक्ष, एक महामंत्री और एक कार्यकारिणी सदस्य शामिल किए गए हैं। गाजियाबाद में प्रतिनिधित्व दो से बढ़कर तीन पदों तक पहुंचा है। हापुड़ में भी नई टीम में दो पदाधिकारी शामिल किए गए हैं, जबकि पिछली टीम में जिले से एक महामंत्री था। मेरठ नई टीम में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला जिला है। मेरठ से आठ लोगों को शामिल किया जाना क्षेत्रीय कार्यकारिणी के जिलावार प्रतिनिधित्व में सबसे प्रमुख तथ्य है।
नई क्षेत्रीय टीम का गठन 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों के संदर्भ में हुआ है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में विधानसभा सीटें होने के कारण क्षेत्रीय संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। नई कार्यकारिणी में अलग-अलग जिलों को दी गई जिम्मेदारियां संगठन के क्षेत्रीय ढांचे का हिस्सा हैं। विशेष रूप से मेरठ, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़ को मिले प्रतिनिधित्व से इन जिलों की संगठनात्मक भागीदारी स्पष्ट होती है। हालांकि, केवल पदों के वितरण के आधार पर चुनावी परिणाम या राजनीतिक प्रभाव के बारे में कोई निष्कर्ष उपलब्ध जानकारी से नहीं निकाला जा सकता। नई टीम की वास्तविक संगठनात्मक भूमिका आगे की गतिविधियों में सामने आएगी।
Explore Related Topics
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें