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जाह्नवी कपूर की पहचान के दुरुपयोग पर HC की नजर, 6,884 यूआरएल का मामला

अदालत ने सभी 6,884 यूआरएल को एक साथ हटाने का व्यापक आदेश देने के बजाय सामग्री और उसके इस्तेमाल के उद्देश्य पर अलग-अलग विचार करने का फैसला किया।
Bureau
Bureau News Desk
05 Sep 2026
12:38 PM
1 min read
जाह्नवी कपूर की पहचान के दुरुपयोग पर HC की नजर, 6,884 यूआरएल का मामला
हाइलाइट्स
जाह्नवी कपूर ने इंटरनेट पर अपने नाम, तस्वीर और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर याचिका दायर की है।
याचिका में 6,884 यूआरएल की पहचान की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी यूआरएल को एक साथ हटाने का व्यापक आदेश देने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया।
अदालत इन यूआरएल को सामग्री की प्रकृति और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देख रही है।

नई दिल्ली। अभिनेत्री जाह्नवी कपूर के नाम, तस्वीर और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यापक कानूनी सवालों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को न्याय मित्र नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने तीन सितंबर को यह नियुक्ति की। मामला इंटरनेट पर अभिनेत्री की पहचान के कथित दुरुपयोग से संबंधित है, जिसमें नाम और तस्वीर के इस्तेमाल के साथ अन्य आपत्तिजनक सामग्री का भी उल्लेख किया गया है।

जाह्नवी कपूर की ओर से दायर याचिका में इंटरनेट पर उनके नाम और छवि के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई गई है। याचिका में अश्लील एवं आपत्तिजनक सामग्री, अभिनेत्री की पहचान की नकल करने और व्यावसायिक लाभ के लिए उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा उठाया गया है।

याचिका में अभिनेत्री की ओर से कुल 6,884 यूआरएल की पहचान की गई है। ये यूआरएल इंटरनेट पर उपलब्ध उन सामग्री या पृष्ठों से संबंधित हैं, जिनके बारे में याचिका में उनकी पहचान और छवि के अनधिकृत इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है।

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हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इन सभी लिंक को एक साथ हटाने के लिए व्यापक आदेश देने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अदालत अब इन यूआरएल को उनकी सामग्री की प्रकृति और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखने की प्रक्रिया अपना रही है।

इसका मतलब यह है कि मामले में सामने आए सभी यूआरएल को एक समान मानकर उन पर एक ही तरह की कार्रवाई करने के बजाय अदालत उनके स्वरूप और उपयोग के आधार पर अलग-अलग विचार कर रही है।

मामले में व्यापक कानूनी सवालों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को न्याय मित्र यानी एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। न्याय मित्र की नियुक्ति अदालत को मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने तीन सितंबर को यह नियुक्ति की। मामले में अदालत के सामने मुख्य मुद्दों में से एक इंटरनेट पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति के नाम, तस्वीर और पहचान के इस्तेमाल से जुड़े दावे हैं।

जाह्नवी कपूर की याचिका में उनकी पहचान से जुड़े विभिन्न प्रकार के कथित अनधिकृत इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। इसमें उनके नाम और छवि के इंटरनेट पर इस्तेमाल के अलावा अश्लील एवं आपत्तिजनक सामग्री का भी मुद्दा शामिल है। याचिका में उनकी पहचान की नकल करने और उनकी लोकप्रियता का व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का भी मुद्दा उठाया गया है।

इस तरह मामला केवल किसी एक तस्वीर या एक इंटरनेट पृष्ठ तक सीमित नहीं है। याचिका में बड़ी संख्या में यूआरएल की पहचान की गई है, जिसके कारण अदालत के सामने अलग-अलग प्रकार की ऑनलाइन सामग्री पर विचार करने का सवाल भी सामने आया है।

अदालत ने 6,884 यूआरएल को एक साथ हटाने के व्यापक अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है। इसके बजाय इन लिंक को सामग्री की प्रकृति और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखा जा रहा है। यह प्रक्रिया मामले में सामने आए विभिन्न यूआरएल के बीच अंतर करने पर केंद्रित है। यानी किसी लिंक पर उपलब्ध सामग्री क्या है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया है, इन पहलुओं को अलग-अलग देखा जा रहा है। मामले की यह कार्यवाही इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की पहचान, नाम और तस्वीर के इस्तेमाल से जुड़े कानूनी सवालों के संदर्भ में हो रही है।

डिजिटल माध्यमों पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कई अलग-अलग संदर्भों में हो सकता है। जाह्नवी कपूर की याचिका में ऐसे इस्तेमाल को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है, खासकर उन मामलों में जहां याचिका के अनुसार उनकी पहचान की नकल, आपत्तिजनक सामग्री या व्यावसायिक लाभ से जुड़े पहलू मौजूद हैं।

इसी कारण अदालत के सामने पहचाने गए 6,884 यूआरएल की प्रकृति और उनके इस्तेमाल के उद्देश्य को अलग-अलग देखने का सवाल आया है। अदालत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम भाटिया को न्याय मित्र नियुक्त किए जाने से मामले में उठे व्यापक कानूनी सवालों पर अदालत को सहायता मिलने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

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