>उत्तर प्रदेश सरकार अब बुंदेलखंड को एक विश्व स्तरीय पर्यटन हब बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में आने वाले बुंदेलखंड के ऐतिहासिक किलों को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार इन किलों और स्मारकों के विकास और संरक्षण के जरिए पर्यटन को नई उड़ान दे सकती है।
>सीएम योगी ने अपने पत्र में तालबेहट किला (ललितपुर), कालिंजर किला (बांदा), मड़फा (चित्रकूट), बरुआ सागर (झांसी) और घाट की सीढ़ियों को राज्य सरकार को सौंपने का अनुरोध किया है। फिलहाल ये सभी स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन हैं।
>प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पत्र में बुंदेलखंड की भौगोलिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्ता का उल्लेख करते हुए इसे भारत का हृदयस्थल बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पहले दशार्ण, जेजाकभुक्ति और जुझौती के नाम से जाना जाता था और यह पाषाण युग से ही मानव गतिविधियों का केंद्र रहा है।
>गुप्त और चंदेल शासकों के समय में बुंदेलखंड में भव्य मंदिरों और किलों का निर्माण हुआ, जो आज भी यहां की शौर्यगाथाओं और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि यह भूभाग भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के विकास में अमूल्य योगदान देता आया है। यहां शैक्षणिक, कलात्मक, प्राकृतिक, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अपार संभावनाएं हैं, लेकिन लंबे समय तक यह क्षेत्र उपेक्षा का शिकार रहा।
>योगी आदित्यनाथ ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह प्रेरणा दी थी कि इस क्षेत्र के किलों, महलों और स्मारकों को संरक्षित कर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जाए। इसी दृष्टिकोण से राज्य सरकार अब इन धरोहरों को संवारने की तैयारी कर रही है।अगर यह किले राज्य सरकार को हस्तांतरित होते हैं, तो प्रदेश में न केवल पर्यटन को गति मिलेगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र की पहचान केवल ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित न रहकर आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के मॉडल के रूप में भी स्थापित होगी।
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