>उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र खोले जाएंगे। इसी क्रम में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी जिला पुलिस अधिकारियों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी करते हुए केंद्रों की संरचना और कार्यप्रणाली स्पष्ट की है। यह कदम मिशन शक्ति 5.0 अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं से जुड़े अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना और उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान करना है।
>मिशन शक्ति केंद्र थानों के भीतर ही पुलिस चौकी की तरह कार्य करेंगे। इन केंद्रों में महिलाओं से संबंधित शिकायतों की जांच और निस्तारण प्राथमिकता पर होगा। साथ ही, शिकायतकर्ता महिलाओं को संवेदनशील और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन केंद्रों में आने वाली शिकायतों का समाधान संवेदनशीलता, तत्परता और प्राथमिकता के साथ किया जाए।
>प्रत्येक केंद्र में निम्नलिखित व्यवस्था होगी:
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प्रभारी निरीक्षक/उपनिरीक्षक (प्राथमिकता महिला अधिकारी को)
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1 से 4 उपनिरीक्षक
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4 से 15 आरक्षी (50% महिलाएं अनिवार्य)
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1 से 2 महिला होमगार्ड
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आवश्यकता पड़ने पर परामर्शदाता की नियुक्ति
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>कर्मचारियों को 3 से 5 वर्ष की अवधि तक तैनात किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र को अलग कक्ष, कंप्यूटर, अभिलेख, स्टेशनरी, महिला शौचालय और अन्य जरूरी संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर को लोक भवन, लखनऊ से मिशन शक्ति 5.0 की शुरुआत की। यह अभियान महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
>डीजीपी ने थानों के प्रभारी निरीक्षकों और थानाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि मिशन शक्ति केंद्रों के संचालन में किसी भी प्रकार की कमी न रहने पाए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केंद्रों में आने वाली शिकायतों का त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण हो।
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