उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती में सरस्वती विद्या मंदिर के भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह के दौरान एक महत्वपूर्ण और प्रेरक भाषण दिया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक मंच पर हलचल मचा दी। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में देशवासियों के सामने 25 साल की रूपरेखा प्रस्तुत की थी, जिसमें उन्होंने भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की संकल्पना रखी। इसके लिए पंच प्राण अपनाने की बात की गई थी, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण पहलू है – अपनी विरासत का सम्मान और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना।
सीएम योगी ने कश्मीर की विशेष स्थिति पर भी ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने जबरन धारा 370 को लागू किया था, जबकि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने इसे मान्यता नहीं दी थी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1953 में इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके लिए उन्होंने बलिदान भी दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में धारा 370 को समाप्त कर कश्मीर को भारत के कानून के साथ जोड़कर उस ऐतिहासिक संकल्प को साकार किया।
सीएम योगी ने महर्षि वाल्मीकि, प्रभु राम और श्री कृष्ण की विरासत पर भी गौरव प्रकट किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामचरितमानस की रचना करते हुए बताया कि राम स्वयं धर्म का स्वरूप हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसी विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक उपलब्धियां हमें अपने पूर्वजों के बलिदान और आदर्शों को याद दिलाती हैं।
सीएम ने जोर देकर कहा कि भारतीयता की यह परंपरा हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश के उन वीरों, संतों और महापुरुषों की विरासत का संरक्षण करे जिन्होंने आज़ादी दिलाने और भारत को महान बनाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह राष्ट्रवादी संदेश युवाओं में आत्मनिर्भरता, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की भावना को और भी मजबूत करेगा।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें