>उत्तर प्रदेश की सियासी उठापटक में एक बड़ा मोड़ आया है, जिससे सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) की ताकत विधानसभा में फिर से मजबूत हो गई है। मऊ विधानसभा सीट से विधायक रहे अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल होने के बाद सुभासपा के कुल विधायक छह हो गए हैं। यह राहत पार्टी के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में विधायकी रद्द होने के कारण पार्टी को एक बड़ा झटका लगा था।
>अब्दास अंसारी ने 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में सुभासपा के टिकट पर मऊ सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। लेकिन इस वर्ष हेट स्पीच मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा उन्हें दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इसके चलते मऊ सीट खाली घोषित हो गई थी और वहां उपचुनाव की तैयारी भी चल रही थी।
>इस बीच अब्बास अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपना बचाव प्रस्तुत किया और 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी। इसके बाद 8 सितंबर को विधानसभा सचिवालय ने अब्बास की विधायकी बहाल करने का आदेश जारी कर दिया।
>अब यूपी विधानसभा में सुभासपा के छह विधायक हैं – अब्बास अंसारी (मऊ), ओम प्रकाश राजभर (जहूराबाद), हंसु राम (बेल्थारा), त्रिवेणी राम (जाखनियन), दूधराम (महादेवा) और जगदीश नारायण (जाफराबाद)। सुभासपा ने 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद पार्टी ने एनडीए के साथ हाथ मिला लिया था। वर्तमान में ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर कार्यरत हैं।
>इस राजनीतिक घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बदलाव हो रहे हैं। अब्बास अंसारी की पुनः विधायकी बहाली सुभासपा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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