>11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर प्रांगण से देश-दुनिया को योग का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि योग भारतीय मनीषा की अनमोल देन है और इसे लोककल्याण का माध्यम बनाकर भारत ने विश्व कल्याण की राह प्रशस्त की है। इस आयोजन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधुनिक भारत में योग को वैश्विक पहचान दिलाने का श्रेय भी दिया।
>मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया और योग साधकों व प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा, “धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति स्वस्थ शरीर से ही संभव है, और योग इसका प्रमुख साधन है।”
>योग दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन लाइव सुना और उनके मार्गदर्शन में योग को अपनाने का संदेश भी दोहराया। उन्होंने कहा कि योग शरीर और मस्तिष्क को न केवल स्वस्थ रखता है बल्कि चेतना के उच्चतम स्तर तक ले जाने वाला माध्यम है।
>सीएम योगी ने यह भी कहा कि भारत की ऋषि परंपरा, वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों में योग के गूढ़ ज्ञान को मानवता के कल्याण हेतु संरक्षित किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “जब दुनिया योग के आसनों को पेटेंट करने की होड़ में लगी थी, तब प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में पहल कर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दिलाई, जो भारत की सांस्कृतिक विजय थी।”
>मुख्यमंत्री ने बताया कि योग से बीमारियां, बुढ़ापा और मृत्यु तक को परास्त किया जा सकता है, जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है ‘न तस्य रोगो न जरा न मृत्युः प्राप्तस्य योगाग्निमयं शरीरम्।’
यानी योगाग्नि से तपे हुए शरीर को न रोग होता है, न जरा और न मृत्यु।
>इस कार्यक्रम में उनके साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक फतेह बहादुर सिंह, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और योगप्रेमी उपस्थित रहे। मंदिर परिसर के अलग-अलग भागों में भी सामूहिक योगाभ्यास हुआ।
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