बिजली व्यवस्था को लेकर सीएम योगी ने दिया सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच अधिकारियों को निर्देश, शिकायत निस्तारण और फीडर मॉनिटरिंग पर जोर।
Bureau 24 May 2026, 03:50 PM 1 min read
बिजली व्यवस्था को लेकर सीएम योगी ने दिया सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

 

भीषण गर्मी के बीच प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गांव हो या शहर, प्रदेश में कहीं भी बिजली संकट की स्थिति नहीं बननी चाहिए। शिकायत निस्तारण, ट्रांसफार्मर मरम्मत और फीडर संचालन में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय करने और शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

 

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसके अलावा जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट तथा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से 3,742 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। प्रदेश में गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गर्मी, आंधी और तूफान जैसी परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए त्वरित रिस्पांस सिस्टम 24 घंटे सक्रिय रखा जाए। साथ ही फीडरवार मॉनिटरिंग के जरिए शिकायतों के तत्काल समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 

बैठक में ट्रांसफार्मर क्षति में आई कमी को भी सकारात्मक उपलब्धि बताया गया। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई है। बड़े वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षति दर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

 

प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि भीषण गर्मी के दौरान पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक पहुंच गई। मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसमें विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो और हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।

 

उपभोक्ता सेवाओं को तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने 1912 हेल्पलाइन और स्मार्ट मीटर प्रणाली की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था के तहत अब प्रतिदिन 90 हजार कॉल संभालने की क्षमता विकसित की गई है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी बताया जाना चाहिए कि उनकी समस्या कब तक दूर होगी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति किसानों की सिंचाई, उद्योगों की उत्पादन क्षमता, व्यापारिक गतिविधियों और आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए हर स्तर पर सतर्कता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में लगाए गए 89.23 लाख स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया है। जून से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर माह 1 से 10 तारीख के बीच बिल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने समय पर और सही बिल उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए बिलिंग और कलेक्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर दिया।

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