हाईकोर्ट के आदेश पर ललित तिवारी ने ली पार्षद पद की शपथ, महापौर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार रहे सीज

फैजुल्लागंज वार्ड तृतीय मामले में शपथ ग्रहण में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी, सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत।
Bureau 24 May 2026, 03:31 PM 1 min read
हाईकोर्ट के आदेश पर ललित तिवारी ने ली पार्षद पद की शपथ, महापौर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार रहे सीज

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद फैजुल्लागंज वार्ड तृतीय से उपविजेता घोषित किए गए ललित किशोर तिवारी को रविवार सुबह पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। सुबह करीब नौ बजे महापौर सुषमा खर्कवाल ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण से पहले हाईकोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए थे।

 

ललित किशोर तिवारी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे। यह मामला दिसंबर 2025 से न्यायालय में विचाराधीन था। चुनाव न्यायाधिकरण ने 19 दिसंबर 2025 को दिए आदेश में तत्कालीन निर्वाचित पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन निरस्त कर दिया था। न्यायाधिकरण ने कहा था कि निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक जानकारी न देना कदाचार की श्रेणी में आता है। इसके आधार पर उपविजेता ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित किया गया था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से 19 जनवरी और 4 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके शपथ ग्रहण नहीं कराया गया। इस पर ललित तिवारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की।

 

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 25 मार्च को कहा था कि महापौर न्यायालय के आदेशों और विधिक प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इसके बावजूद शपथ ग्रहण नहीं कराया गया। बाद में न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने 11 मई को महापौर, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को 13 मई के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब किया था।

 

पीठ ने एक सप्ताह के भीतर शपथ ग्रहण कराने का समय देते हुए कहा था कि यदि महापौर शपथ नहीं कराती हैं तो जिलाधिकारी या मंडलायुक्त शपथ ग्रहण कराकर 21 मई तक शपथपत्र अदालत में प्रस्तुत करें। इस बीच प्रदीप कुमार शुक्ला ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। हालांकि 20 मई को उनके अधिवक्ता द्वारा याचिका वापस लिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

 

21 मई को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जब राज्य सरकार, जिलाधिकारी और नगर निगम पक्ष से पूछा कि क्या याची को शपथ दिला दी गई है, तो जवाब न में मिलने पर अदालत ने नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की पीठ ने महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करने का आदेश दिया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि जब तक ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक महापौर के अधिकार सीज रहेंगे। साथ ही नगर निगम का कामकाज महापौर को अनुपस्थित मानकर संचालित करने की बात भी कही गई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है।

 

यह था पूरा मामला

 

फैजुल्लागंज वार्ड तृतीय के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला को 4972 मत मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी को 3298 वोट प्राप्त हुए थे। चुनाव परिणाम के बाद ललित तिवारी ने निर्वाचन प्रक्रिया को चुनौती दी थी। चुनाव न्यायाधिकरण ने सुनवाई के बाद कहा था कि प्रदीप कुमार शुक्ला ने निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं, जो निर्वाचन नियमों के उल्लंघन और कदाचार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर उनका निर्वाचन निरस्त करते हुए ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित किया गया था।

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