पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ने का आरोप

महानगरों में फिर बढ़े ईंधन के दाम, कांग्रेस नेताओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
Bureau 20 May 2026, 01:17 PM 1 min read
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ने का आरोप

 

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने ईंधन कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को आम जनता पर आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

 

प्रमोद तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती कीमतों के जरिए आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाला जा रहा है।

 

कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भी ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ईंधन दरों को नियंत्रित करने में विफल रही है, जिसके कारण आम लोगों को व्यापक आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल कदम उठाने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने देने की मांग की।

 

देश के कई महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई, जबकि डीजल 91 पैसे महंगा होकर 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया।

 

मुंबई में पेट्रोल की कीमत में 91 पैसे की वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद यह 107.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई। चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे महंगा होकर 104.49 रुपये प्रति लीटर पहुंचा, जबकि डीजल 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया।

 

कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में 96 पैसे की वृद्धि हुई, जिसके बाद इसकी दर 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गई। वहीं डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई।

 

एक सप्ताह के भीतर ईंधन कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

आर्थिक विशेलकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते संकट का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर पड़ा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। इसी के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है।

 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है। देश के कई महानगरों में ईंधन के दाम एक बार फिर बढ़े हैं, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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