>दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास सोमवार शाम हुए ब्लास्ट ने देश को दहला दिया। इस घटना में 12 लोगों की मौत और कई घायल हुए, जबकि जांच एजेंसियां सबूतों की पड़ताल में जुटी हैं। घटना ने न सिर्फ भारत की राजधानी में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि दुनिया भर से इस पर प्रतिक्रियाओं की बौछार हुई है।
>सबसे पहले प्रतिक्रिया चीन की ओर से आई। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि वे इस घटना से स्तब्ध हैं और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस विस्फोट में कोई चीनी नागरिक हताहत नहीं हुआ है। भारत में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने भी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि चीन इस मुश्किल समय में भारत के साथ खड़ा है।
>रूस भी इस घटना से दुखी है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने उम्मीद जताई कि चल रही जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे और दोषियों को सजा मिलेगी।
>अमेरिका ने भी चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर मदद प्रदान करने को तैयार है। बयान में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई।
>श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, और नेपाल सरकार ने भी दुख प्रकट किया और भारत के साथ एकजुटता दिखाई। मालदीव ने विशेष रूप से कहा कि भारत के साथ इस कठिन समय में हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
>सबसे तीखी प्रतिक्रिया सिंगापुर से आई। भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने इस घटना को आतंकी हमला बताया और कहा कि सिंगापुर इसकी निंदा करता है।
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