>जब प्रशासन सुनने में असफल होता है, तो समाज का कमजोर वर्ग अपनी आस्था और साहस से आवाज उठाता है। बुंदेलखंड के महोबा में दिव्यांगों ने यही किया। स्थानीय समस्याओं और 27 सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए प्रशासन से निराश होकर दिव्यांग महा त्यागी राम जी दास और उनके चार साथियों ने एक अनोखा तरीका अपनाया – हाथ में ज्ञापन और भगवान कामतानाथ के लिए श्रीफल लेकर दंडवत यात्रा पर निकल पड़े।
>सौरा गांव के जंगल में रहने वाले राम जी दास ने बताया कि अधिकारियों को बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मूलभूत जरूरतों और योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। इस ज्ञापन में सभी दिव्यांगों के लिए निशुल्क घरेलू कनेक्शन, रोजगार हेतु ई-रिक्शा और ऑटो टेंपो परमिट, बिना ब्याज का लोन, ₹5000 मासिक पेंशन, आवास और आरक्षण कोटा बढ़ाकर 10% करने जैसी मांगें शामिल हैं।
>विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार भारती ने कहा कि "कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए अब हमें भगवान कामतानाथ की शरण में जाना पड़ा।" दिव्यांगों का कहना है कि उनका यह अनोखा प्रदर्शन न केवल संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि जब प्रशासन निष्क्रिय हो जाता है, तब समाज के कमजोर वर्ग अपनी आस्था और हिम्मत से भी अपनी मांगों की आवाज उठा सकते हैं।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें