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24 शिकायतों के बाद खुला फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के 20 आरोपी गिरफ्तार

गाजियाबाद में संयुक्त पुलिस कार्रवाई के दौरान 17 महिलाएं भी पकड़ी गईं, साइबर अपराध पोर्टल पर पहले से दर्ज थीं 24 शिकायतें; लैपटॉप, मोबाइल, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेज बरामद
Bureau
Bureau News Desk
15 Jul 2026
06:56 PM
1 min read
24 शिकायतों के बाद खुला फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के 20 आरोपी गिरफ्तार
हाइलाइट्स
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज 24 शिकायतों के बाद पुलिस ने की कार्रवाई।
राजेंद्र नगर स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 20 आरोपी गिरफ्तार।
गिरफ्तार आरोपियों में 17 महिलाएं भी शामिल।
नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग और इंटरव्यू फीस लेने का आरोप।

गाजियाबाद। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद गाजियाबाद पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर कथित साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। साहिबाबाद थाना पुलिस, स्वाट टीम और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में राजेंद्र नगर स्थित दुर्गा इंडस्ट्रियल एरिया में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 17 महिलाएं भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस कॉल सेंटर के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अब तक 24 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। शिकायतों के आधार पर की गई जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, पेन ड्राइव, प्रिंटर और एक लग्जरी कार बरामद की है। बरामद सामग्री को जांच के लिए कब्जे में लेकर उसके डिजिटल और वित्तीय पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितने लोगों को निशाना बनाया गया और कथित तौर पर कितनी धनराशि की ठगी की गई।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह का संचालन अभिषेक जैन द्वारा किया जा रहा था, जिसने जैनसन इंटरनेशनल के नाम से एक फर्म बनाई थी। पुलिस का आरोप है कि इसी फर्म की आड़ में उसकी पत्नी लीना, रिश्तेदारों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था।

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पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर में युवतियों और युवकों को नौकरी पर रखा गया था। इन कर्मचारियों के माध्यम से बेरोजगार लोगों को फोन कर रोजगार उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था।

जांच में सामने आया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से अलग-अलग चरणों में धनराशि मांगी जाती थी। पुलिस के अनुसार, रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, इंटरव्यू फीस और कमीशन समेत विभिन्न मदों के नाम पर रकम वसूली जाती थी। भुगतान करने के बाद भी लोगों को नौकरी नहीं मिलती थी। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला था और कितने लोग इसका शिकार बने।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर लगातार प्राप्त शिकायतों के आधार पर इस कॉल सेंटर की गतिविधियों की निगरानी की गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद साहिबाबाद थाना पुलिस, स्वाट टीम और क्राइम ब्रांच ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित वित्तीय लेनदेन का पता लगाया जा सके।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही बरामद डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

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