नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली के वेलकम और भजनपुरा थाने के थाना प्रभारियों को तलब किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मामले में अपना जवाब देने का निर्देश दिया है।
मामला पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान से संबंधित है। याचिका में हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से दाखिल रिपोर्ट में शिकायत के क्षेत्राधिकार को लेकर दोनों थानों की ओर से अलग-अलग स्थिति सामने आई। इसी बिंदु पर अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण मांगा है।
सुनवाई के दौरान वेलकम थाना पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल रिपोर्ट में कहा गया कि जिस वीडियो को लेकर शिकायत की गई है, वह भजनपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके बाद शिकायत को भजनपुरा थाने भेजे जाने की बात कही गई। हालांकि, अदालत के समक्ष यह स्थिति सामने आई कि भजनपुरा थाना पहले ही शिकायत को वेलकम थाने भेज चुका था। इस तरह शिकायत दोनों थानों के बीच भेजे जाने का मामला सामने आया। अदालत ने दोनों पुलिस रिपोर्ट का परीक्षण करते हुए यह भी पाया कि शिकायत को एक थाने से दूसरे थाने भेजने के लिए रिपोर्ट में संबंधित कानूनी आधार स्पष्ट नहीं किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि पुलिस की ओर से दाखिल रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शिकायत में किसी अपराध के घटित होने का आधार बनता है या नहीं। इसी स्थिति को देखते हुए अदालत ने वेलकम और भजनपुरा थाने के एसएचओ को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को 13 अक्टूबर को उपस्थित होकर शिकायत के क्षेत्राधिकार और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के संबंध में जवाब देना होगा। अदालत का यह निर्देश फिलहाल पुलिस रिपोर्ट और शिकायत से जुड़े प्रक्रियात्मक पहलुओं पर केंद्रित है। इसे हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
यह मामला हिमंता बिस्वा सरमा के कथित भाषण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि भाषण में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इसी आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर अदालत का रुख किया गया। मामले की मौजूदा सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य प्रश्न शिकायत की सामग्री के साथ-साथ पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई और उसके क्षेत्राधिकार से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस की दोनों रिपोर्ट में शिकायत को लेकर क्षेत्राधिकार की स्थिति स्पष्ट रूप से एक जैसी नहीं थी। एक रिपोर्ट में वीडियो को भजनपुरा थाना क्षेत्र से संबंधित बताया गया, जबकि शिकायत को लेकर भजनपुरा थाने की ओर से उसे वेलकम थाने भेजे जाने की बात सामने आई।
किसी शिकायत पर कार्रवाई करते समय संबंधित पुलिस थाने का क्षेत्राधिकार महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक विषय होता है। यदि पुलिस को लगता है कि मामला किसी अन्य थाना क्षेत्र से संबंधित है, तो शिकायत को संबंधित थाने भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस मामले में अदालत के सामने यह सवाल उठा कि शिकायत को दोनों थानों के बीच स्थानांतरित करने का कानूनी आधार पुलिस रिपोर्ट में स्पष्ट क्यों नहीं किया गया। अदालत ने इसी पहलू पर दोनों थाना प्रभारियों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, अदालत ने दोनों एसएचओ को तलब किया है और उनसे रिपोर्ट तथा शिकायत के संबंध में जवाब मांगा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया है। अदालत के समक्ष फिलहाल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर प्रक्रिया जारी है। आगे की सुनवाई में पुलिस अधिकारियों के जवाब और अदालत के समक्ष उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले में अगला कदम तय होगा।
एसवाई कुरैशी भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। मौजूदा मामले में उनका नाम उस शिकायत के संदर्भ में आया है जिसमें हिमंता बिस्वा सरमा के कथित बयान को लेकर आपत्ति जताई गई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत में किसी व्यक्ति के खिलाफ दायर शिकायत या याचिका में लगाए गए आरोप अपने आप में आरोप सिद्ध होने के समान नहीं होते। मामले में आरोपों की न्यायिक जांच और आगे की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में होती है।
इस मामले से जुड़ी हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राउज एवेन्यू अदालत ने हिमंता बिस्वा सरमा और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग से संबंधित मामले में दिल्ली पुलिस से कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट भी मांगी थी। उस रिपोर्ट के अनुसार अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई थी। मौजूदा मामले में पुलिस की ओर से शिकायत के क्षेत्राधिकार को लेकर दाखिल रिपोर्ट अदालत के परीक्षण के दायरे में है। अदालत द्वारा दोनों थाना प्रभारियों को तलब किया जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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