>राजधानी लखनऊ में मानव तस्करी के एक बड़े गैंग का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लड़कियों को प्रेमजाल और भक्ति के नाम पर फंसाकर बेचने वाला गैंग अब तक 15 नाबालिग लड़कियों का सौदा कर चुका है। लखनऊ पुलिस की सतर्कता से इस गिरोह से जुड़े दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया है और दो नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया गया है।
संत प्रेमानंद से मिलने निकली थी लड़की, बन गई तस्करी का शिकार
>DCP साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि 30 जून को कृष्णानगर इलाके की एक 16 वर्षीय लड़की अचानक लापता हो गई थी। वह संत प्रेमानंद की भक्त थी और उनसे मिलने वृंदावन जाने की इच्छा रखती थी। चारबाग रेलवे स्टेशन पर वह अकेली और परेशान दिखी, तभी आरोपी संतोष साहू उसके पास आया।
>संतोष ने पहले उसे संत से मिलवाने का झांसा दिया, फिर कानपुर, प्रयागराज होते हुए मध्य प्रदेश के शहडोल ले गया और उसे 50,000 रुपए में मनीष भंडारी उर्फ मोनू को बेच दिया।
ब्रेनवॉश से लेकर सौदेबाज़ी तक—गैंग की कहानी रोंगटे खड़े कर देगी
>जब लड़की को असलियत का पता चला तो उसने चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। मनीष ने डर के कारण लड़की को वापस लौटा दिया और 45000 रुपए संतोष से वापस ले लिए। इसके बाद संतोष, लड़की को मानक नगर स्टेशन पर छोड़कर भाग गया। यहां से पुलिस ने लड़की को बरामद किया।
सर्विलांस से पकड़ाया नेटवर्क, दो तस्कर गिरफ्तार
>पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस के जरिए आरोपियों को ट्रैक किया और अवध चौराहे के पास से दोनों को गिरफ्तार कर लिया। संतोष साहू (शहडोल, म.प्र.) और मनीष भंडारी (अजमेर, राजस्थान) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें रायबरेली से लाई गई एक और नाबालिग लड़की को एक होटल से सुरक्षित बरामद किया गया।
2012 से चल रहा सौदों का सिलसिला
>पुलिस पूछताछ में सामने आया कि संतोष और मनीष 2012 से एक-दूसरे के संपर्क में हैं। संतोष नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फंसाता, फिर मनीष को बेच देता। मनीष उन्हें आगे राजस्थान और हरियाणा में जबरन विवाह या घरेलू कार्य के लिए बेच देता था।
>अब तक ये करीब 15 मासूम बच्चियों का सौदा कर चुके हैं। पुलिस को संदेह है कि गिरोह का जाल अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।
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