>उत्तर प्रदेश में जल संकट के समाधान और किसानों की सिंचाई समस्याओं के स्थायी हल की दिशा में उठाए गए कदम अब रंग ला रहे हैं। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की अध्यक्षता में लघु सिंचाई विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक में यह उजागर हुआ कि तालाबों के पुनर्जीवन और जल संचयन की योजनाओं से कई अतिदोहित विकासखंड अब सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं।
>लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में आयोजित बैठक में मंत्री ने विभागीय अभियंताओं से जमीनी हालात पर प्रजेंटेशन के माध्यम से फीडबैक लिया और बड़े तालाबों के जीर्णोद्धार की कार्ययोजना को तेज़ी से लागू करने के निर्देश दिए।
तालाब पुनर्जीवन से बदली महोबा की तस्वीर
>बैठक में महोबा जिले की रिपोर्ट ने विशेष रूप से सबका ध्यान खींचा, जहां पहले चारों विकासखंड कबरई, चरखारी, जैदपुर और पनवाड़ी अतिदोहित श्रेणी में थे।
>लघु सिंचाई विभाग के जल संचयन और चेकडैम निर्माण जैसे कार्यों के चलते कबरई और चरखारी अब सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं। इससे न केवल पीने के पानी की किल्लत में कमी आई है, बल्कि किसानों को अनुदानित बोरिंग और सोलर पंप का लाभ मिल रहा है, जिससे कृषि आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
82 से घटकर 50 रह गए अतिदोहित विकासखंड
>वर्ष 2017-18 में जहां 82 विकासखंड जल संकट की श्रेणी में थे, वहीं वर्तमान में यह संख्या घटकर 50 रह गई है। मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में वृहद सर्वेक्षण कर जल स्रोतों को चिह्नित किया जाए और अवैध कब्जों से मुक्त कर उनका पुनर्जीवन किया जाए।
अगली पीढ़ी के लिए जल बचाओ का संकल्प
>बैठक में अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि झीलों और तालाबों से अवैध कब्जा हटाकर जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जाए। साथ ही, जल संचयन बनाम दोहन का संतुलन सुनिश्चित किया जाए ताकि प्राकृतिक धरोहर “जल” को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके।
>मुख्य अभियंता देवेन्द्र कुमार द्वारा विभागीय कार्यों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया गया, जिस पर मंत्री और अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया।
बैठक में रहे प्रमुख रूप से उपस्थित:
- जल शक्ति राज्यमंत्री श्री रामकेश निषाद
- विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग
- लघु सिंचाई विभाग के सभी अधीक्षण, अधिशासी एवं सहायक अभियंता
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