लखनऊ। जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों में आयकर विभाग ने कार्रवाई का अगला चरण शुरू कर दिया है। ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद अब विभाग करीब 450 करोड़ रुपये की अघोषित आय के मामले में कर, जुर्माना और ब्याज की वसूली की तैयारी कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संभावित वसूली की राशि 500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए आयकर विभाग ने मुख्यालय से अनुमति मांगी है।
जौहर ट्रस्ट पूर्व मंत्री आजम खां और उनके स्वजनों से जुड़ा है। आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट से संबंधित वित्तीय लेनदेन, आय के स्रोत और ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े कई बिंदुओं की पड़ताल की गई है। विभाग की कार्रवाई के बाद अब मामला कर, जुर्माना और ब्याज की संभावित वसूली के अगले चरण में पहुंच गया है।
आयकर विभाग की अब तक की जांच में करीब 450 करोड़ रुपये की अघोषित आय से संबंधित मामला सामने आने की बात कही गई है। इसी आधार पर विभाग कर, जुर्माना और ब्याज की गणना कर संभावित वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, विभाग ने इस कार्रवाई के लिए अपने मुख्यालय से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संभावित कुल वसूली 500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
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इस मामले में आयकर विभाग जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण और उससे जुड़ी आयकर छूट पहले ही रद्द कर चुका है। जून 2026 में जारी विभागीय आदेश और जांच से संबंधित रिपोर्टों में ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों तथा उसके संचालन को लेकर कई सवाल दर्ज किए गए थे। आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट की घोषित आय और बैंक खातों में दिखाई देने वाली रकम के बीच अंतर से जुड़े तथ्य भी सामने आने की रिपोर्टें हैं। जून में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्षों 2020-21 से 2023-24 के दौरान घोषित आय करीब 38.54 करोड़ रुपये थी, जबकि खातों में जमा राशि करीब 97.79 करोड़ रुपये बताई गई थी। विभाग ने इन अंतर को जांच का हिस्सा बनाया था।
आयकर विभाग ने ट्रस्ट को अलग-अलग चरणों में नोटिस जारी कर वित्तीय लेनदेन और आय के स्रोत से संबंधित जानकारी देने का अवसर दिया था। विभाग की ओर से की गई जांच के मुताबिक, ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी से कई सवालों का समाधान नहीं हो सका। इसके बाद विभाग ने अघोषित आय से जुड़े प्रावधानों के तहत कर, जुर्माना और ब्याज की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है। ताजा कार्रवाई इसी प्रक्रिया का अगला चरण बताई जा रही है।
जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बनी इमारतों के निर्माण पर खर्च भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आयकर विभाग और मूल्यांकन से संबंधित रिपोर्टों में विश्वविद्यालय परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंके जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट की ओर से इन निर्माण कार्यों पर दर्शाए गए खर्च और मूल्यांकन में सामने आई लागत के बीच अंतर पाया गया। इसी अंतर तथा धन के स्रोत से संबंधित जानकारी को लेकर आयकर विभाग ने ट्रस्ट से जवाब और दस्तावेज मांगे थे। इस मामले में सरकारी धन के इस्तेमाल से संबंधित आरोप भी जांच का हिस्सा हैं। इन आरोपों की जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है और उपलब्ध रिपोर्टों में इन्हें विभागीय जांच के निष्कर्षों और आरोपों के रूप में ही बताया गया है।
आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट के संचालन और उसके ट्रस्टियों की भूमिका से जुड़े पहलुओं को भी देखा गया। जून 2026 में सामने आई विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के नौ सदस्यों में से पांच आजम खां के परिवार से संबंधित बताए गए थे। रिपोर्ट में कुछ अन्य ट्रस्टियों की भूमिका को लेकर भी सवाल दर्ज किए गए थे। इसके अलावा ट्रस्ट को मिले चंदे और कुछ दानदाताओं से संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की गई। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आयकर विभाग ने ट्रस्ट को दान देने वाली कुछ फर्मों के संबंध में अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेज मांगे थे।
जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच भी जारी है। ईडी ने ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ की है और ट्रस्ट से संबंधित चल-अचल संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की है। ईडी की जांच में जौहर विश्वविद्यालय परिसर की उन इमारतों से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए हैं, जिनके निर्माण में सरकारी विभागों से प्राप्त धन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों में विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च से जुड़े दस्तावेजों और रकम के स्रोत की जांच का उल्लेख किया गया था।
आयकर विभाग की कार्रवाई के साथ ईडी की संपत्ति संबंधी जांच भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियां ट्रस्ट से संबंधित चल और अचल संपत्तियों तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही हैं। सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी इमारतों पर आगे की कार्रवाई को लेकर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। हालांकि किसी संपत्ति की जब्ती की अंतिम कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध जानकारी को संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना है।
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