उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 81 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा ‘भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र’ निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। परियोजना के इस वर्ष के अंत तक पूर्ण होने और आम जनता के लिए खोलने की संभावना जताई जा रही है।
यह स्मारक लंबे समय से उठ रही मांग का परिणाम माना जा रहा है। अंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष लालजी निर्मल के अनुसार, डॉ. अंबेडकर की पत्नी सविता अंबेडकर ने भी उनके नाम पर एक भव्य स्मारक की इच्छा व्यक्त की थी। प्रस्ताव को राज्य सरकार के समक्ष रखने के बाद इसे मंजूरी दी गई, जिसके पश्चात वर्ष 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसका शिलान्यास किया था।
निर्माणाधीन इस सांस्कृतिक केंद्र को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। इसमें 500 लोगों की क्षमता वाला सभागार और एक विशेष ध्यान केंद्र शामिल है। इसके अलावा, डॉ. अंबेडकर के जीवन और भारतीय संविधान के निर्माण में उनके योगदान को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय और पुस्तकालय की भी व्यवस्था की जा रही है। केंद्र में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अंबेडकर विश्वविद्यालय के सहयोग से पीएचडी स्तर तक के अध्ययन और शोध की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ट्रस्ट के अनुसार, वर्तमान में सुरक्षित रखे गए डॉ. अंबेडकर के अस्थि कलश को भी इस नए भवन में स्थापित किया जाएगा। साथ ही देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों और आगंतुकों के लिए ठहरने और भोजन की सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा जारी है। ट्रस्ट अध्यक्ष लालजी निर्मल ने कहा कि सरकार द्वारा डॉ. अंबेडकर के सम्मान में कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें सरकारी कार्यालयों में उनके चित्र लगाना और उनकी प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए बजट प्रावधान शामिल हैं।
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