>राजधानी समेत मंडल के अन्य जिलों में सरकारी और ग्राम सभा की ज़मीनों पर वर्षों से फैले अवैध कब्जों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इस मुहिम के तहत अब प्लॉटवार सर्वेक्षण, GIS मैपिंग और ज़ीरो-टैगिंग जैसे तकनीकी उपायों का सहारा लिया जा रहा है ताकि अतिक्रमण की पहचान तेजी से हो और सरकारी ज़मीनें मुक्त कराई जा सकें।
>प्रशासन के अनुसार, यह अभियान सिर्फ कब्जा हटाने का नहीं बल्कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को फिर से स्थापित करने का मिशन है। विशेष रूप से उन उच्च-मूल्य वाले भूखंडों और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां अवैध कॉलोनियां तेजी से उभर रही हैं।
राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमें सक्रिय
>राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमें अब हर क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं। अवैध प्लॉटिंग, बाउंड्री वॉल निर्माण या जमीन की अवैध बिक्री जैसे मामलों पर सीधे कार्रवाई की जा रही है। जिन जमीनों पर अवैध कब्जा पाया जा रहा है, उन्हें तत्काल खाली कराया जा रहा है और वहां उचित बाड़बंदी व संकेतक लगाए जा रहे हैं ताकि दोबारा कब्जा न हो सके।
अधिकारी भी अब होंगे जवाबदेह
>इस पूरी प्रक्रिया में अगर कोई अधिकारी लैंड माफिया को संरक्षण देते या कार्रवाई में लापरवाही करते पाए गए, तो उनके खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंडलायुक्त रोशन जैकब ने सख्त शब्दों में कहा, “चुप्पी या मिलीभगत से अतिक्रमण को बढ़ावा देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है।”
>गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में नगर आयुक्त गौरव कुमार, एलडीए संयुक्त सचिव एस.पी. सिंह, राजस्व विभाग, नगर निगम, और शहरी नियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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