>राजधानी लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। जानकीपुरम क्षेत्र में एक महिला को बिना किसी वैध दस्तावेज के मकान मालिक की अनुमति के बिना बिजली कनेक्शन दे दिया गया। इतना ही नहीं, जिस घर का कनेक्शन पहले से स्थायी रूप से काटा जा चुका था, वही मीटर दोबारा जोड़ दिया गया। अब विभाग के अभियंता इस फैसले पर कोई स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
>पीड़ित मकान मालिक शकूर ने दैनिक जागरण को बताया कि उन्होंने 3 मार्च को अलीगंज क्षेत्र में भवन संख्या 643 बी/8 केएचजी, बेलीगारद, सेक्टर-पी को प्रशांत वर्मा से 10 लाख रुपये में खरीदा और उसकी विधिवत रजिस्ट्री कराई। घर में पहले प्रशांत वर्मा के पिता राम आधार के नाम से बिजली कनेक्शन था, जिसे शकूर ने खरीद के बाद स्थायी रूप से कटवा दिया।
>इसके कुछ ही समय बाद एक महिला शकूर से निवास की अनुमति लेकर घर में रहने लगी। हैरानी की बात यह है कि उसी महिला ने बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर पुराने मीटर को दोबारा चालू करवा लिया — बिना किसी कागजी प्रक्रिया के।
>शकूर के अनुसार, उनके पास बिजली विभाग से जारी सभी जरूरी दस्तावेज हैं, जिनसे साबित होता है कि कनेक्शन पहले ही PD (स्थायी विच्छेदन) के अंतर्गत कटवाया जा चुका था। इसके बावजूद, बिना उनकी जानकारी और अनुमति के दोबारा वही मीटर लगाकर बिजली चालू कर दी गई।
>इस पूरे मामले पर डालीगंज के अधिशासी अभियंता सुशील कुमार वर्मा का कहना है कि "मानवीय दृष्टिकोण" अपनाते हुए मीटर दोबारा जोड़ा गया और महिला को 10 दिन का समय दिया गया है। मगर यह तर्क विभागीय नियमों और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
>मामला जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह के संज्ञान में आने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्थायी विच्छेदन के बाद मीटर दोबारा जोड़ा गया है, तो यह पूर्णतया नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो न सिर्फ कनेक्शन बल्कि मीटर भी हटाया जाएगा।
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