देवदूत बनी केजीएमयू की डॉक्टर्स टीम जान का खतरा बन गई थी बच्चे के गले में धंसी कील

News Desk 29 May 2025, 06:18 AM 1 min read
देवदूत बनी केजीएमयू की डॉक्टर्स टीम जान का खतरा बन गई थी बच्चे के गले में धंसी कील


>डॉक्टर्स को धरती पर भगवान यू ही नहीं कहा जाता, राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर्स की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर एक मासूम की जान बचाई है। केजीएमयू के डाक्टरों ने जटिल सर्जरी कर सात साल की बच्ची की जान बचाने में सफलता पाई।


>दरअसल, खेल-खेल में एक कील बच्ची की गर्दन से होती हुई दिमाग में धंस गई थी,करीब 8 सेंटीमीटर (8 cm.) लम्बी कील दिमाग की एक नस के पास तक पहुंच गई थी। डाक्टरों का कहना है कि अगर समय से कील को निकाला न जाता तो बच्ची में स्थाई विकलांगता के साथ जान का खतरा हो सकता था।


>सर्जरी टीम में शामिल डा. समीर मिश्रा ने बताया कि बच्ची बलरामपुर जिले के नवाजपुर की रहने वाली थी। पिछली 15 मई को खेलते समय एक 8 सेंटीमीटर की कील बच्ची की गर्दन में घुस गई। कील काफी पतली थी जिस कारण वह गर्दन और मुंह का चीरती हुई दिमाग तक पहुंच गई थी। घरवाले सबसे पहले उसे नजदीक के निजी अस्पताल ले जाए, जहां से डाक्टरों ने बच्ची को जिला चिकित्सालय भेज दिया। जिला चिकित्सालय में भी बच्ची का इलाज नहीं हो पाया तो डाक्टरों ने उसे केजीएमयू के ट्रामा सेंटर  रेफर कर दिया।


>ट्रामा में 16 मई को डाक्टर समर और डॉ. आशुतोष ने बच्ची को देखा और उसे तुरन्त भर्ती कराया। बच्ची की हालत के बारे में डा. समर ने ट्रामा सर्जरी विभागाध्यक्ष  डॉ. संदीप तिवारी और डॉ. समीर मिश्रा को जानकारी दी। उन्होंने जल्द से जल्द बच्ची के ऑपरेशन का फैसला लिया। क्योंकि कील गर्दन और मुंह के रास्ते होते हुए दिमाग तक गई थी जिस वजह से ईएनटी और न्यूरोसर्जरी के डाक्टरों से भी राय लेनी जरूरी थी। इसलिए ऑपरेशन के लिए तीनों विभागों के डाक्टरों की एक संयुक्त टीम बनाई गई। उसी दिन 16 मई की रात दस बजे डॉ. समीर मिश्रा और डॉ. वैभव जायसवाल की टीम ने इस चुनौती भरे जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया।

13 दिन पीआईसीयू में रही बच्ची


>ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत काफी गंभीर हो गई थी। डॉ. समीर ने बताया कि ऑपरेशन तो पूरी तरह से सफल रहा मगर बच्ची की उम्र कम होने के कारण कई प्रकार की अन्य दिक्कतें आ गईं थीं। इसके लिए डॉ. विशाल की देखरेख में बच्ची को 29 तारीख तक पीआईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अब बच्ची पूरी तरह से ठीक है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।

ऑपरेशन करने वाली टीम


>इस जटिल ऑपरेशन को करने वाली टीम में डॉ. समीर मिश्रा, डॉ. वैभव जायसवाल, डॉ. यादवेन्द्र, सीनियर रेजिडेंट डॉ. लोकेश, जेआर डॉ. अर्पिता, जेआर डॉ. अर्चना, एसआर डॉ. आकांक्षा, एसआर डॉ. विशाल, एसआर डॉ. रंजीत चन्द्र आदि शामिल रहे।

← Previous Story Next Story →

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें


Related News

अलीगंज अग्निकांड के बाद केजीएमयू पहुंचे अखिलेश यादव, पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये की मदद की मांग
15 मौतों के बाद खुलीं पुरानी फाइलें, रिपोर्ट में सामने आए 1043 भवनों से जुड़े तथ्य
मोमबत्तियों की रोशनी में नम हुई आंखें, छात्रों की याद में निकला कैंडल मार्च
रात 3:30 बजे चीखों से टूटी लोगों की नींद, छत पर पहुंचते ही सामने था खून से लथपथ मां का चेहरा
'दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे'... बलिदान दिवस पर CM योगी ने याद किया डॉ. मुखर्जी का संदेश
अब बीएसबी स्कूलों के छात्रों के रिकॉर्ड भी राष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़ेंगे, यूपी सरकार ने तेज की बड़ी प्रक्रिया
जिस इमारत में गईं 15 जानें, अब उसी पर बुलडोजर की तैयारी? 2016 का आदेश फिर चर्चा में
लखनऊ अग्निकांड के बाद सवालों की बौछार, संसद से बुलडोजर कार्रवाई तक तेज हुई सियासत
2016 में गिराने का आदेश हुआ था, फिर 15 लोगों की जान लेने वाली इमारत कैसे बची रही?