राजधानी लखनऊ के जिला कोर्ट परिसर के बाहर रविवार उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब अवैध चैंबरों और अतिक्रमण को हटाने पहुंची नगर निगम की टीम का वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में कई वकील मशीनों के सामने खड़े हो गए। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र में हंगामा मच गया।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मियों ने वकीलों और मौजूद लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाईं। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। घटनास्थल पर पुलिसकर्मी भी पत्थर उठाते नजर आए। पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर दिखाई दी।
जानकारी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने परिसर के आसपास कुल 240 अवैध निर्माण चिह्नित किए, जिनमें बड़ी संख्या वकीलों के चैंबर और दुकानें थीं। आदेश के अनुपालन में रविवार सुबह करीब नौ बजे नगर निगम की टीम 10 बुलडोजर और लगभग 300 पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान करीब 90 चैंबर तोड़े जाने की बात प्रशासनिक स्तर पर कही गई है।
नगर निगम की टीम ने चैंबरों में रखी कुर्सियां, चटाइयां और अन्य सामान वाहनों में भरकर हटाया। कार्रवाई के दौरान एक वकील ने अपना चैंबर बंद कर आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने बगल का चैंबर तोड़कर उसे बाहर निकाला। घटना के बाद मौके पर मौजूद वकीलों में नाराजगी और बढ़ गई।
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि पिछले कई वर्षों से चल रहे विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। वर्ष 2020 में सदर तहसील क्षेत्र में कुछ वकीलों के चैंबर तोड़े गए थे। उस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि वकीलों के पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की गई है। इसके बाद अक्टूबर 2025 में लखनऊ सिविल कोर्ट परिसर में सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों के अस्थायी चैंबर प्रशासन द्वारा हटाए गए थे, जिसका वकीलों ने विरोध किया था।
जनवरी 2026 में कोर्ट परिसर के बाहर अवैध कब्जों और अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने लगीं। इसी दौरान अधिवक्ता सुनीता सिंह समेत अन्य लोगों ने चैंबरों और अतिक्रमण को लेकर अदालत में याचिकाएं दाखिल कीं। सात मई को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद 12 मई को नगर निगम की टीम ने अवैध चैंबरों और ढांचों पर लाल रंग का निशान लगाकर 16 मई तक जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था।
रविवार को हुई कार्रवाई के बाद फिलहाल अभियान रोक दिया गया है। नगर निगम की टीम और अतिरिक्त पुलिस बल मौके से हट गया है। बुलडोजर भी वापस लौट गए हैं। हालांकि इलाके में सामान्य पुलिस बल तैनात रखा गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
कार्रवाई के डर से आसपास के रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दीं। पूरे क्षेत्र में तोड़े गए चैंबरों, दुकानों और अन्य अतिक्रमण का मलबा अभी भी फैला हुआ है। नगर निगम के डंपरों में काफी मलबा भरकर हटाया गया, जबकि कुछ स्थानों पर कबाड़ियों को बुलाकर टूटे सामान को बेचे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
नगर निगम के अनुसार स्वास्थ्य भवन की ओर बने 72 चैंबर और निबंधन भवन की तरफ 17 से 18 चैंबर हटाए गए हैं। वहीं वकीलों का दावा है कि 200 से अधिक चैंबर तोड़े गए हैं। प्रशासन का कहना है कि नाले पर बने अन्य चैंबरों के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा, हालांकि आज आगे कार्रवाई की संभावना अब नजर नहीं आ रही है।
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