राजधानी लखनऊ में नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। 300 से अधिक शिकायतों के फर्जी निस्तारण और विकास कार्यों को कागजों में पूरा दिखाने के आरोपों के बाद 23 अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कई मामलों में बिना कार्य कराए सड़क मरम्मत को पूर्ण दर्शाया गया। सीवर लीकेज से जुड़ी शिकायतों को भी कागजों में निपटाने की बात सामने आई है। इसके अलावा हाउस टैक्स और म्यूटेशन मामलों में भी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद नगर निगम में हलचल तेज हुई। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने संबंधित 23 अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच के दायरे में जोनल अफसरों से लेकर चीफ इंजीनियर और एक्सईएन स्तर के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी के पत्र के बाद कार्रवाई की रफ्तार बढ़ी। फर्जी निस्तारण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और दोषी अधिकारियों की सूची अंतिम चरण में है। नगर निगम द्वारा शासन को विस्तृत प्रतिवेदन भेजने की तैयारी की जा रही है। प्रकरण में प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बरती जा रही है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
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