राजधानी लखनऊ में कर्मचारियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 26 फरवरी को बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने का संकेत दिया है।
समिति का आरोप है कि चुनिंदा शहरों को फ्रेंचाइजी मॉडल पर देने की तैयारी तेज की जा रही है, जिससे पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत निगमों के निजीकरण का रास्ता आसान हो सकता है। समिति का कहना है कि जिन शहरों में फ्रेंचाइजी मॉडल लागू हुआ है, वहां वर्टिकल सिस्टम के तहत हजारों संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है।
नियमित कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों से भी विभाग में असंतोष बढ़ा है। समिति ने आरोप लगाया कि निलंबन और ट्रांसफर के जरिए भय का वातावरण बनाया जा रहा है।
इस बीच विभाग ने होली तक सुधार कार्य के नाम पर बिजली आपूर्ति बाधित न करने का निर्णय लिया है। यदि अत्यावश्यक कार्य होगा तो उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद ही आपूर्ति रोकी जाएगी। बाजार और आवासीय क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित होने की शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया।
गोमतीनगर क्षेत्र के लिए प्रस्तावित बिजली कटौती योजना फिलहाल स्थगित कर दी गई है। विपिनखंड उपकेंद्र क्षेत्र में 14 दिन की प्रस्तावित कटौती भी रोक दी गई है। संघर्ष समिति की 26 फरवरी की बैठक में स्मार्ट मीटर और अन्य मुद्दों पर आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय होने की संभावना जताई जा रही है।
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