पहले नशीला पदार्थ फिर बलात्कार और फिर धर्म परिवर्तन का दवाब

लुलु मॉल में 'धर्म' और 'दुष्कर्म' का काला सच: मैनेजर गिरफ्तार, खंगाले जा रहे 'नेटवर्क' के तार!
News Desk 08 Jul 2025, 09:36 PM 1 min read
पहले नशीला पदार्थ फिर बलात्कार और फिर धर्म परिवर्तन का दवाब


>लखनऊ का हाई-प्रोफाइल लुलु मॉल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बेहद चौंकाने वाली और विचलित कर देने वाली है. मॉल में काम करने वाली एक युवती ने अपने सीनियर मैनेजर पर सिर्फ यौन शोषण का ही नहीं, बल्कि धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक प्रताड़ना का भी गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस मामले की परतें अभी और खुलने की संभावना है.


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पीड़िता के दावों के अनुसार, आरोपी, जिसकी पहचान मोहम्मद फरहाज उर्फ फराज (उम्र 27 वर्ष) के रूप में हुई है, ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और इसका वीडियो भी बना लिया. इस वीडियो का इस्तेमाल कर उसने पीड़िता से पैसे ऐंठे और लगातार धमकाता रहा कि अगर उसने धर्म नहीं बदला, तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा. यह केवल धमकी तक ही सीमित नहीं रहा; विरोध करने पर आरोपी ने उसे सिगरेट से जलाया, गालियां दीं और मारपीट भी की.


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FIR में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि फरहाज उस पर लगातार धर्म बदलने का दबाव बना रहा था. पीड़िता के शब्दों में, "वह कहता था कि अगर इस मॉल में काम करना है, तो इस्लाम कुबूल करो." आरोपी ने बार-बार उसकी आस्था और विश्वास का अपमान किया.


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डीसीपी नार्थ निपुण अग्रवाल ने बताया कि आरोपी फरहाज के खिलाफ दुष्कर्म, धर्म परिवर्तन सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. आरोपी को 8 जुलाई को थाने पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया और औपचारिकताओं के बाद न्यायालय में रिमांड पर भेज दिया गया है.


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इस मामले को सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. लखनऊ पुलिस और दक्षिणी जोन कमिश्नरेट की टीमें अब मॉल के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता चल सके कि कहीं यह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है. यह जांच इस मामले को और भी गंभीर बना देती है, क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति के अपराध से कहीं आगे जाकर एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर सकता है.


>लुलु मॉल जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर इस तरह के आरोपों का सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. क्या मॉल प्रबंधन को ऐसे मामलों की जानकारी थी? क्या कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे? पुलिस की गहन जांच ही इन सवालों के जवाब सामने लाएगी.

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