>संसद का मानसून सत्र 2025 शुरू होने से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने जनता की भावनाओं को आवाज़ देते हुए सरकार और विपक्ष दोनों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से संसद सत्र को जनहित के मुद्दों पर केंद्रित करने की जोरदार अपील की है।
>मायावती ने स्पष्ट किया कि इस सत्र को सियासी हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए, बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, सीमा और आंतरिक सुरक्षा जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर ठोस नीतियाँ और समाधान निकलने चाहिए। उन्होंने सरकार और विपक्ष से पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में एकजुटता दिखाने की बात कही।
>"जनता को न हो निराशा, संसद चले सार्थकता की ओर"
>मायावती ने कहा कि जनता को संसद से बहुत उम्मीदें होती हैं, लेकिन जब सत्र हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप में उलझ जाता है, तो आमजन का विश्वास लोकतंत्र से डगमगाने लगता है। इसलिए ज़रूरी है कि इस बार का सत्र परिणामोन्मुख हो, न कि केवल राजनीतिक टकराव से भरा।
>उन्होंने यह भी कहा कि देश भाषाई व क्षेत्रीय टकराव, महंगाई, रोजगार संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से पीड़ित है। ऐसी स्थिति में संसद को एक नीतिगत परिवर्तन केंद्र बनना चाहिए।
>"देशहित पहले, राजनीति बाद में"
>बसपा प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे आंतरिक हो या सीमा सुरक्षा, देश की संप्रभुता से जुड़े मामलों में केवल सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी समान ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चाहिए कि वह केवल विरोध के लिए विरोध न करे, बल्कि सकारात्मक सहयोग से नीति निर्माण में भागीदारी निभाए।
>‘ऑपरेशन सिंदूर’ व पहलगाम नरसंहार पर हो चर्चा
>मायावती ने कश्मीर के पहलगाम नरसंहार और उससे जुड़े ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने मांग की कि इन विषयों को टालने के बजाय सरकार को एक जिम्मेदार लोकतंत्र के रूप में उन्हें सामने लाकर पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए।
>वैश्विक चुनौतियों में एकजुटता ही समाधान
>मायावती ने वैश्विक स्तर पर बदलते हालात का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज जिन राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, उसका मुकाबला केवल तभी संभव है जब संसद में एकजुटता हो। उन्होंने कहा कि आज देश को लंबी सोच, ठोस नीति और सशक्त नेतृत्व की ज़रूरत है।
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