>अब्दुल्ला ने बताया कि ब्लास्ट के बाद जम्मू-कश्मीर के लोग जब भी केंद्र शासित प्रदेश से बाहर जाते हैं, वे खुद को संदेह की निगाहों से घिरा महसूस करते हैं। उनके अनुसार, मौजूदा माहौल के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों को बाहर भेजने से कतराने लगे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों के कृत्य को पूरे समाज से जोड़ देना न तो न्यायसंगत है और न ही यह सकारात्मक माहौल तैयार करता है।
>अब्दुल्ला का कहना था कि उनके लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे खुद दिल्ली में जम्मू-कश्मीर रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ी चलाने से पहले कई बार सोचते हैं। आज हालात ऐसे हो गए हैं कि JK नंबर की गाड़ी को दिल्ली में अपराध की नजर से देखा जा रहा है।
>दिल्ली कार ब्लास्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि अपराधियों की पहचान और कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों का काम है, लेकिन सामाजिक स्तर पर एक धारणा बनाई जा रही है कि इस घटना के लिए सभी कश्मीरी ज़िम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सुरक्षा घेरे से बाहर निकलते समय उन्हें आशंका रहती है कि कहीं कोई व्यक्ति उन्हें रोके और उनकी पहचान पर सवाल उठाए।
>10 नवंबर को दिल्ली की एक व्यस्त सड़क पर हुए कार ब्लास्ट में 15 लोगों की जान चली गई। इस बड़े हमले की जांच में दिल्ली पुलिस की विशेष टीम, एनआईए और क्राइम ब्रांच जैसी कई एजेंसियां जुटी हुई हैं। घटना के बाद हरियाणा के फरीदाबाद क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर के 500 से अधिक लोगों की व्यापक जांच की गई है। पुलिस के अनुसार, यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया, ताकि किसी संभावित संदिग्ध की पहचान की जा सके।
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