लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का हुआ शुभारम्भ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन किया।
Bureau 24 Apr 2026, 08:34 PM 1 min read
लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का हुआ शुभारम्भ

 

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को लखनऊ में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का शुभारम्भ किया। इस सम्मेलन में 9 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में व्यावहारिक दृष्टिकोण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न एग्रोक्लाइमेटिक जोन और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि लक्ष्य तय करना आवश्यक है, जिससे क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से कृषि क्षेत्र के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने में मदद मिलती है और वैज्ञानिक नवाचारों को खेत तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र थे, जो अब बढ़कर 89 हो गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

  • गेहूं: 425 लाख मीट्रिक टन
  • धान: 211 लाख मीट्रिक टन
  • आलू: 245 लाख मीट्रिक टन

 

उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 कुंतल तक पहुंच गया है। साथ ही, किसानों ने बहुफसली खेती अपनाते हुए कई लाख हेक्टेयर में अतिरिक्त फसल उत्पादन शुरू किया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कृषि केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट के वाराणसी स्थित केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां विकसित नई धान किस्मों और तकनीकों से किसानों को लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कृषि को वैल्यू एडिशन से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 85-86 प्रतिशत भूमि सिंचित है और किसानों को 10-12 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि संभव हुई है।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि और विकास के क्षेत्र में नया इतिहास रचा है और कई क्षेत्रों में देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपना कृषि रोडमैप तैयार करना चाहिए और किसानों के लिए “फार्मर आईडी” जैसी पहल उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सहायक होगी।

 

सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, वैज्ञानिकों और किसानों ने भाग लिया। इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों के प्रतिनिधि शामिल रहे, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए।

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