>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के तीन दिवसीय व्याख्यान कार्यक्रम को लेकर सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। दावा किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि, इस पर खुद यादव ने साफ किया कि न तो उन्हें कोई निमंत्रण मिला है और यदि निमंत्रण आता भी है, तो वह इसमें शामिल नहीं होंगे।
>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने जा रहा यह कार्यक्रम "आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा: नए क्षितिज" विषय पर आधारित है। इसका सीधा प्रसारण विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।
आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि मोहन भागवत इस दौरान राजनीति, समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अहम मुद्दों पर विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से संवाद करेंगे।
>इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 1,300 प्रतिष्ठित लोग शामिल होने की संभावना है। इनमें राजनीतिक दलों के नेता, पूर्व न्यायाधीश, नौकरशाह, खिलाड़ी, राजनयिक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।
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पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई
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पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल
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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी
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क्रिकेटर कपिल देव
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ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा
इसके अलावा अमेरिका, चीन, कुवैत, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के राजनयिक भी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
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>आंबेकर ने कहा कि आरएसएस ने विभिन्न धर्मों – ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों की प्रतिष्ठित हस्तियों को भी आमंत्रित किया है। वहीं, विपक्षी नेताओं को बुलाने की खबरों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
रामगोपाल यादव के इनकार ने साफ कर दिया कि सपा फिलहाल इस मंच से दूरी बनाए रखना चाहती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी नेताओं की मौजूदगी से संघ की ‘विचारधारा संवाद’ पहल को नया आयाम मिल सकता है।
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