रूस-ईरान का सस्ता तेल, चीन ने बढ़ाई खरीद; भारत का आयात घटा

रूस और ईरान के रियायती तेल से चीन ने आयात बढ़ाया। भारत का रूसी तेल आयात 40% तक घटने का अनुमान। एशियाई ऊर्जा बाजार में बदलते समीकरण।
News Desk 26 Feb 2026, 04:42 PM 1 min read
रूस-ईरान का सस्ता तेल, चीन ने बढ़ाई खरीद; भारत का आयात घटा

यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच वैश्विक कच्चे तेल बाजार में नई हलचल देखी जा रही है। जहां भारत ने अमेरिकी दबाव और संभावित प्रतिबंधों के जोखिम को देखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद घटाई है, वहीं चीन रूस और ईरान से रियायती दरों पर तेल खरीदकर अपने आयात और भंडार बढ़ा रहा है।

 

ऊर्जा शोध फर्म रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, रूस से भारत का तेल आयात जनवरी की तुलना में लगभग 40% घटकर करीब 6 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है। इससे एशियाई बाजार में रूसी तेल की मांग का दबाव कम हुआ है।

 

रिपोर्ट्स बताती हैं कि रूस का ‘यूराल्स’ ग्रेड तेल आईसीई ब्रेंट बेंचमार्क से लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल कम पर उपलब्ध है, जबकि ‘ईरानियन लाइट’ भी वैश्विक बेंचमार्क से करीब 11 डॉलर प्रति बैरल नीचे बिक रहा है। इस मूल्य अंतर का लाभ चीनी रिफाइनरियां उठा रही हैं।

 

वेसल ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, फरवरी के पहले 18 दिनों में चीन के बंदरगाहों पर रूसी तेल की आवक 2.09 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गई, जो जनवरी से 20% अधिक और दिसंबर से लगभग दोगुनी है। डेटा फर्म क्लेपर के अनुसार, इस वर्ष अब तक ईरान से चीन को लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात हुआ है।

 

समुद्र में तैरते टैंकरों में ईरानी तेल का भंडार बढ़कर करीब 48 मिलियन बैरल हो गया है, जो फरवरी की शुरुआत के 33 मिलियन बैरल से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में आयात पैटर्न में यह बदलाव वैश्विक कीमतों, शिपिंग मार्गों और ऊर्जा भू-राजनीति पर असर डाल सकता है।

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