>उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बरेली जाने से रोकने के बाद सियासी गलियारे में खलबली मच गई है। यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व वाले इस डेलीगेशन को पुलिस ने जाने से रोक दिया, जबकि दिल्ली से तीन सांसद इकरा हसन, मोहिबुल्लाह नदवी और हरेंद्र मालिक भी बरेली के लिए रवाना हुए थे, लेकिन मेरठ टोल प्लाजा पर उन्हें वापस लौटा दिया गया।
>इस घटना पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने योगी सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “उत्तर प्रदेश सरकार डरी हुई और घबराई हुई है। चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता के बीच जाने से रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह तानाशाही का उदाहरण है, और चुने हुए सांसदों पर इस तरह की पाबंदी सही नहीं है।”
>प्रियंका ने कहा कि सपा डेलीगेशन कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा है, न ही वह कानून-व्यवस्था में बाधा डाल रहा है। उनका उद्देश्य केवल बरेली में हालात का जायजा लेना और जनता की समस्याओं को सामने लाना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस पाबंदी को हटाएगी और प्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारी निभाने का मौका मिलेगा।
>इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासी गर्मी को और बढ़ा दिया है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनिंदा प्रतिनिधियों और सांसदों पर असंवैधानिक पाबंदियां लगा रही है।
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