Azam Khan: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद रामपुर कारागार से बाहर आते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आजम खान गिरफ्तार कर लिया था। रविवार को गाजियाबाद कोर्ट में पेशी होने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अब उच्चतम न्यायालय से भी सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान को तगड़ा झटका लगा है।
उच्चतम न्यायालय ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली आजम की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि प्रधान न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले की अगली सुनवाई इसी सप्ताह हो सकती है। उच्चतम न्यायालय में आजम खान की ओर से अधिवक्ता निजाम पाशा ने सुनवाई की मांग की थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दलीलों पर विचार किया, लेकिन तत्काल सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। लेकिन अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले पर इस सप्ताह सुनवाई हो सकती है।
विदित हो कि वरिष्ठ नेता आजम खान को शनिवार शाम रामपुर जिला जेल से रिहा किया गया था। लेकिन जेल से बाहर निकलने के 20 मिनट के अंदर ही आजम खान को ईडी टीम ने गिरफ्तार कर लिया था और गाजियाबाद ले गई। गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेशी के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। जिसके बाद आजम खान डासना जेल भेज दिया गया है। अब रिमांड कस्टडी को लेकर सुनवाई होने की संभावना है। विदित हो कि पूरा मामला रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है।
ईडी ने आजम खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज 58 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी ने धनशोधन निवारण कानून के तहत जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क किया था। संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है। ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन का उपयोग निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। एजेंसी की ओर से आजम खान अनियमितताओं में मदद करने का आरोप है। वहीं रामपुर विकास प्राधिकरण ने भी विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।
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