>झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का सोमवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर दी, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
>शिबू सोरेन को झारखंड में 'दिशोम गुरु' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'राष्ट्र का गुरु'। उन्होंने अपना पूरा जीवन जनजातीय समाज के उत्थान और झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई में समर्पित कर दिया। पिछले 38 वर्षों से वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेता और संरक्षक रहे। उनका निधन न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है।
>नेताओं ने जताया गहरा शोक
>शिबू सोरेन के निधन पर राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने X पर लिखा, "झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! जनजातीय समाज के उन्नयन में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।"
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अखिलेश यादव ने उन्हें "आदिवासी, वंचित समाज की बुलंद आवाज़" बताते हुए लिखा, "ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं।"
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मायावती ने कहा, "झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक एवं आदिवासी समाज के जाने-माने दिग्गज नेता शिबू सोरेन का निधन अति-दुखद है।" उन्होंने हेमंत सोरेन और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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>अस्पताल ने दी जानकारी
>शिबू सोरेन लंबे समय से गुर्दे संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। सर गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ए. के. भल्ला ने बताया कि उन्हें सुबह 8:56 बजे मृत घोषित किया गया। वे पिछले एक महीने से जीवन रक्षक प्रणाली पर थे। हेमंत सोरेन ने अपने पिता के निधन पर भावुक होते हुए X पर लिखा, "आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए... मैं आज 'शून्य' हो गया हूं।"
>शिबू सोरेन का जाना भारतीय राजनीति में एक रिक्त स्थान छोड़ गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा। झारखंड के लोग उन्हें हमेशा एक ऐसे नेता के रूप में याद करेंगे, जिन्होंने उनके अधिकारों और पहचान के लिए संघर्ष किया।
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