एसएससी की भर्ती परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के खिलाफ चल रही जांच में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। नोएडा इकाई ने इस मामले में गिरोह के कथित मास्टरमाइंड लोकेश को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 92 मोडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सहित बड़ी मात्रा में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल जांच के अनुसार भर्ती परीक्षाओं में नकल कराने के लिए किया जाता था।
एसटीएफ के अनुसार आरोपी राजस्थान के अलवर जिले के देसूला क्षेत्र स्थित कृष्णा कॉलोनी का रहने वाला है। जांच एजेंसी का दावा है कि वह विभिन्न राज्यों में विशेष रूप से तैयार की गई स्क्रीन और अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराता था, जिनका उपयोग परीक्षा केंद्रों में कथित तौर पर हाईटेक नकल के लिए किया जाता था।
इस मामले में एसटीएफ पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस के अनुसार 22 अप्रैल 2026 को नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित एक परीक्षा केंद्र से जुड़े मामले में केंद्र संचालक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई के दौरान नकदी और प्रॉक्सी सर्वर भी बरामद किए गए थे। बाद में गिरोह के एक अन्य सदस्य इंद्रजीत उर्फ योगी को भी गिरफ्तार किया गया, जबकि लोकेश फरार चल रहा था। जांच एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं।
एसटीएफ की जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह को इस्तेमाल के लिए विशेष रूप से तैयार की गई मोडिफाइड टीएफटी स्क्रीन लोकेश उपलब्ध कराता था। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसकी भूमिका सामने आने के बाद उसकी तलाश तेज की गई और अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार लोकेश अलवर में "मानसी इन्फोटैक" नाम से दुकान संचालित करता था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने वर्ष 2017 में हरियाणा के एक व्यक्ति से इस तकनीक की जानकारी हासिल की थी। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इस प्रकार के उपकरण उपलब्ध करा रहा था।
एसटीएफ ने आरोपी के ठिकाने से 92 मोडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद की हैं। इसके अलावा 45 वीजीए ग्राफिक्स कार्ड, 14 रेसबेरी पाई, दो वाई-फाई डोंगल, लैपटॉप, केबल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इन उपकरणों का इस्तेमाल परीक्षा के दौरान एक विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार करने में किया जाता था।
एसटीएफ के मुताबिक परीक्षा केंद्र में लगी सामान्य दिखने वाली स्क्रीन को विशेष तकनीक की मदद से बाहरी सिस्टम से जोड़ा जाता था। इसके लिए वाई-फाई डोंगल और प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल किया जाता था। जांच के अनुसार बाहर मौजूद साल्वर प्रश्नों को हल कर उत्तर वापस संबंधित सिस्टम तक भेज देता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ उपकरण जैमर की प्रभावी सीमा से बाहर कार्य करते थे। हालांकि, इन तकनीकी पहलुओं की आगे भी जांच की जा रही है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली की पुष्टि कर रही हैं।
एसटीएफ का कहना है कि बरामद उपकरणों और आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल किन-किन परीक्षा केंद्रों और राज्यों में किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोग अभी सक्रिय हैं या नहीं।
आरोपी के खिलाफ नॉलेज पार्क थाने में पहले से दर्ज मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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