उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। बुधवार को राजधानी लखनऊ में सैकड़ों अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी बड़ी संख्या में विधानसभा की ओर बढ़े। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोकते हुए हिरासत में लिया। प्रशासन के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई। हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रदर्शन स्थल इको गार्डन भेजा गया।
इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि अभ्यर्थी गले में झाड़ू और मटकी लटकाकर पहुंचे। यह प्रतीकात्मक विरोध था, जिसके जरिए उन्होंने अपनी नाराजगी और उपेक्षा का आरोप जताया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार दलित और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के हितों की अनदेखी कर रही है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो रही, जिससे मामला लंबित बना हुआ है।
69000 शिक्षक भर्ती विवाद लंबे समय से जारी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 2019 की सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधार पर नई चयन सूची तीन महीने के भीतर जारी की जाए। हालांकि, अब तक नई सूची जारी नहीं होने से अभ्यर्थियों में असंतोष बना हुआ है।
यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां वर्ष 2024 में पहली सुनवाई हो चुकी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की ओर से सक्रिय पहल नहीं होने के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग 19 हजार पदों पर आरक्षण को लेकर विवाद है। अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से इसे “आरक्षण घोटाला” बताते हुए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि विभिन्न जिलों में आंदोलन को रोकने के लिए उन्हें हाउस अरेस्ट किया जा रहा है। उनका दावा है कि पिछले छह वर्षों से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच, 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद न्यायालय में लंबित रहने के साथ-साथ सड़कों पर भी सक्रिय विरोध के रूप में जारी है।
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