कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए सपा-भाजपा में लगी होड़

UP Assembly Election 2027: से पहले कुर्मी वोट बैंक को लेकर सपा और भाजपा की रणनीति तेज। पंकज चौधरी, राम प्रकाश चौधरी और राकेश वर्मा की भूमिका अहम।
News Desk 17 Dec 2025, 07:38 PM 1 min read
कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए सपा-भाजपा में लगी होड़


>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार दोनों दलों का विशेष फोकस कुर्मी वोट बैंक पर देखा जा रहा है, जिसे चुनावी गणित में अहम माना जा रहा है।


>प्रदेश की सियासत में जातीय समीकरणों के बीच कुर्मी समाज को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। भाजपा ने कुर्मी समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पंकज चौधरी को आगे किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे कुर्मी मतदाताओं के बीच संगठनात्मक आधार को मजबूती मिलेगी।


>वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी जवाबी रणनीति अपनाते हुए बस्ती से सांसद राम प्रकाश चौधरी और पूर्व मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इसके साथ ही सपा ने विभिन्न जातियों से जुड़े नेताओं को आगे बढ़ाकर व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश देने की कोशिश की है।


>सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रणनीति में दलित, ब्राह्मण, भूमिहार और ओबीसी वर्ग के नेताओं को संतुलित रूप से शामिल करना शामिल है, जिसे पार्टी 2022 और 2024 के चुनावों में आजमा चुकी है।


>भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, भारतीय जनता पार्टी सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर काम करती है और किसी नेता को केवल जाति तक सीमित नहीं मानती।


>सपा प्रवक्ता राकेश अहीर ने कहा, हमारे पास कुर्मी समाज सहित सभी जातियों के प्रतिनिधि हैं और व्यापक सामाजिक संतुलन हमारी ताकत है। दोनों दलों की तैयारियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कुर्मी वोट बैंक और जातीय संतुलन की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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