उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर और भविष्य में बढ़ते जल संकट की चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने 'भूजल सप्ताह-2026' की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक जनआंदोलन का रूप देना है। अभियान के दौरान प्रदेशभर में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से जल संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजधानी लखनऊ के लोहिया पार्क एम्फीथिएटर में आयोजित उद्घाटन समारोह में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि राज्य सरकार वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है, लेकिन इन प्रयासों की सफलता आम लोगों की सक्रिय भागीदारी पर भी निर्भर करेगी।
इस वर्ष आयोजित अभियान का संदेश "जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प" रखा गया है। कार्यक्रम में लोगों से अपील की गई कि 'कैच द रेन-2026' अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि जनसहभागिता के अभियान के रूप में अपनाया जाए।
लोगों से वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को संरक्षित करने, अनावश्यक भूजल दोहन से बचने, दैनिक जीवन में पानी की बचत करने और "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान भी किया गया।
कार्यक्रम में नमामि गंगे के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान समय में जल संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता विकसित की जाती है तो भविष्य में जल संकट की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर जल संरक्षण विषय पर आधारित जल आर्ट गैलरी, जल एंथम, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी लोगों को पानी बचाने का संदेश दिया गया।
भूजल सप्ताह के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से चित्रकला प्रतियोगिता, वाद-विवाद, जनसंवाद, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल संरक्षण से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने उपस्थित लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। साथ ही ऑनलाइन आयोजित भूजल क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को 'स्कूल ऑफ जलवीर सम्मान' से सम्मानित किया गया।
अभियान के अगले चरण में शुक्रवार को लखनऊ स्थित भूजल भवन में वैज्ञानिकों, अभियंताओं, शिक्षाविदों और जल विशेषज्ञों के साथ जल संरक्षण पर विशेष संवाद आयोजित किया जाएगा। वहीं सरोजिनी नगर में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों और उनके प्रभावी उपयोग पर चर्चा की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, सिंचाई के लिए भूजल पर बढ़ती निर्भरता और वर्षा जल के पर्याप्त संचयन की कमी को इसके प्रमुख कारणों में माना जाता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग को जल संरक्षण की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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