सेवानिवृत्ति से पहले बड़ा मोड़: क्या यूपी के मुख्य सचिव को मिलेगा सेवा विस्तार?

उत्तर प्रदेश में मुख्य सचिव और IAS मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार मिल सकता है. योगी सरकार ने इस संदर्भ में प्रस्ताव भेजा है.
News Desk 16 Jul 2025, 12:58 AM 1 min read
सेवानिवृत्ति से पहले बड़ा मोड़: क्या यूपी के मुख्य सचिव को मिलेगा सेवा विस्तार?


>लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के मुख्य सचिव आईएएस मनोज कुमार सिंह को एक साल के सेवा विस्तार की सिफारिश करते हुए केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। यदि केंद्र से मंजूरी मिलती है, तो 1988 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी का कार्यकाल 31 जुलाई 2026 तक बढ़ सकता है।


>मनोज कुमार सिंह, जो आगामी 31 जुलाई 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, वर्तमान में मुख्य सचिव के अलावा IITDC (इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) और पीआईसीयूपी (PICUP) के अध्यक्ष का भी पदभार संभाल रहे हैं। उनका प्रशासनिक कौशल, औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने की रणनीति और 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदमों को सरकार ने प्रमुख रूप से रेखांकित किया है।


>सेवा विस्तार क्यों? जानिए सरकार की दलील


>राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पत्र में लिखा गया है कि मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में:


    >
  • प्रदेश का औद्योगिक माहौल मजबूत हुआ

  • निवेशकों का विश्वास बढ़ा

  • उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने नई गति पकड़ी

  • इस आफ डुईंग बिज़नेस  के मापदंडों में सुधार हुआ


>उनका प्रशासनिक अनुभव और समझ प्रदेश को विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाने में सहायक रही है।


>सेवा विस्तार न मिलने की स्थिति में कौन बन सकता है नया मुख्य सचिव?


>यदि केंद्र सरकार सेवा विस्तार को मंजूरी नहीं देती है, तो नए मुख्य सचिव की दौड़ में कई नाम चर्चा में हैं:


    >
  1. IAS एस.पी. गोयल – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं

  2. IAS दीपक कुमार – वरिष्ठता के आधार पर संभावित दावेदार

  3. IAS देवेश चतुर्वेदी – फिलहाल केंद्र में तैनात, लेकिन यूपी कैडर में वरिष्ठ


>हालांकि देवेश चतुर्वेदी की मौजूदा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के चलते उनकी संभावनाएं थोड़ी कम मानी जा रही हैं, फिर भी वे सीनियरिटी लिस्ट में शामिल हैं।


>नज़रें केंद्र सरकार के फैसले पर


>अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। योगी सरकार की तरफ़ से की गई यह सिफारिश प्रशासनिक निरंतरता और नीति-नियोजन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि यह स्वीकृत होती है तो यूपी में प्रशासनिक स्थायित्व बना रहेगा और कई प्रमुख योजनाएं तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ सकेंगी।

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