जहां आज तक नहीं मिली जीत, वहीं से अखिलेश का सियासी वार

2027 की जंग का शंखनाद: बीजेपी की रणनीति से सपा करेगी वार, शामली से अखिलेश की नई सियासी चाल
News Desk 18 Jul 2025, 01:01 AM 1 min read
जहां आज तक नहीं मिली जीत, वहीं से अखिलेश का सियासी वार


>लोकसभा चुनाव में उत्साहजनक प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी अब मिशन 2027 के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। इस बार अखिलेश यादव भाजपा को उसी की रणनीति से मात देने की तैयारी में हैं। शुरुआत होने जा रही है पश्चिमी उत्तर प्रदेश की शामली सीट से — एक ऐसी सीट जिसे आज तक सपा ने नहीं जीता, लेकिन इस बार पूरे गणित के साथ यहां सियासी समीकरण साधे जा रहे हैं।


>ये खबर भी पढ़ें: सपा सांसद डिंपल यादव ने योगी सरकार के इस फैसले का किया विरोध...


>108 सीटों पर फोकस: हार को जीत में बदलने की तैयारी


>सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजर उन 108 विधानसभा सीटों पर है, जहां पार्टी लगातार तीन चुनाव से हार झेलती आई है। अब अखिलेश इन सीटों पर खुद रणनीति बनाएंगे। इस सिलसिले में वे 21 और 22 जुलाई को शामली दौरे पर आ सकते हैं, जहां वे समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय नेताओं और संभावित प्रत्याशियों से संवाद कर समीकरण साधने की कोशिश करेंगे।


>शामली में वैश्य+मुस्लिम कार्ड?


>राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस बार सपा शामली सीट से वैश्य समुदाय के नेता को प्रत्याशी बना सकती है। हाल ही में वैश्य नेता राजेश्वर बंसल की अखिलेश यादव से मुलाकात ने इस संभावना को और बल दिया है। बंसल और उनके समर्थकों के सपा में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है। शामली में वैश्य और मुस्लिम मतदाता मिलकर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, जिससे यह संयोजन सपा के लिए फायदेमंद हो सकता है।


>कैराना और थानाभवन के लिए भी तय हो रही रणनीति


>कैराना सीट से पार्टी एक बार फिर मुस्लिम प्रत्याशी पर भरोसा जता सकती है, जबकि थानाभवन सीट से सपा किसी जाट या सैनी समाज के उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती है। यहां इन दोनों जातियों का मजबूत आधार है। सूत्रों के मुताबिक इस क्षेत्र के कई दावेदारों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर अपनी दावेदारी पेश भी कर दी है।


>पिछला सियासी परफॉर्मेंस बना रहा आधार


>2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के गठबंधन को थानाभवन, शामली सदर और कैराना में मिश्रित सफलता मिली थी। वहीं हाल ही के लोकसभा चुनाव में कैराना से इकरा हसन, मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक और सहारनपुर से इमरान मसूद के जीतने से पार्टी का आत्मविश्वास और रणनीति दोनों को मजबूती मिली है।


>सपा बनाम बीजेपी: मुकाबला अब माइक्रो लेवल पर


>सपा अब भाजपा की उस रणनीति को अपनाने जा रही है जिसमें हार की सीटों पर माइक्रो-मैनेजमेंट कर संगठन को मजबूत किया जाता है। यही कारण है कि 2027 के लिए पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र का अलग-अलग सामाजिक, जातीय और राजनीतिक विश्लेषण कर रही है। इससे न सिर्फ प्रत्याशी चयन में सटीकता आएगी, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ भी बनेगी।

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