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समिट बिल्डिंग साइबर फ्रॉड केस में 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, 3 निलंबित

विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग के कॉल सेंटर पर कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों पर पैसे लेकर कुछ आरोपियों को छोड़ने के आरोपों की जांच हुई; 6 कर्मी लाइन हाजिर।
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Bureau News Desk
11 Aug 2026
07:00 PM
1 min read
समिट बिल्डिंग साइबर फ्रॉड केस में 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, 3 निलंबित
हाइलाइट्स
लखनऊ के विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग साइबर फ्रॉड मामले में 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है।
तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।
कॉल सेंटर की 11वीं मंजिल पर पुलिस ने करीब 12 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया था।

लखनऊ। विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग से जुड़े चर्चित साइबर फ्रॉड मामले में अब पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गई है। साइबर ठगी के आरोप में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आई शिकायतों की जांच में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। जांच के बाद कुल 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 3 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, जबकि 6 को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

पूरा मामला लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल से जुड़ा है। यहां सोलारिस सॉल्यूशन के नाम से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों पर विदेशों में रहने वाले नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने के आरोप लगे थे। आरोप था कि कॉल सेंटर में काम करने वाले युवक-युवतियां डॉलर एप और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए विदेशी नागरिकों से संपर्क करते थे। अमेरिका समेत अन्य देशों के नागरिकों के साथ कथित साइबर ठगी की शिकायतों के बाद पुलिस ने कॉल सेंटर पर कार्रवाई की थी।

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कॉल सेंटर के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई करीब 12 घंटे तक चली थी। इस दौरान मौके से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को पकड़ा गया था। मामले में दो ऑपरेशन मैनेजर समेत 119 युवक-युवतियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। आरोपियों की संख्या अधिक होने के कारण उन्हें थाने तक ले जाने के लिए पुलिस को अतिरिक्त वाहनों और बसों की व्यवस्था करनी पड़ी थी। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में युवक-युवतियों के बिल्डिंग से बाहर निकलने के दृश्य भी सामने आए थे। कुछ युवतियां पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अपने चेहरे और बालों से चेहरा ढकती हुई नजर आई थीं।

समिट बिल्डिंग से बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी के बाद मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी शिकायत सामने आई। आरोप लगाया गया कि कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों को हिरासत में लेने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनसे पैसे लिए और उन्हें छोड़ दिया। शिकायत सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू कराई। मामले में कुल 122 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है। इसी कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की गई।

पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह था कि समिट बिल्डिंग में कार्रवाई के दौरान मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाई। जांच में इस बात को भी देखा गया कि क्या किसी आरोपी को नियमों के विपरीत कोई लाभ दिया गया और क्या हिरासत में लिए गए किसी व्यक्ति को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़े जाने की शिकायतों में तथ्य पाए गए। विभागीय जांच पूरी होने के बाद नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

  • 3 पुलिसकर्मी निलंबित
  • 6 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
  • मामले में विभागीय जांच जारी
  • अन्य भूमिका सामने आने पर आगे कार्रवाई संभव

जांच के बाद विभाग ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसके अलावा छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई का आधार जांच के दौरान सामने आए तथ्य बताए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई किसी एक शिकायत या आरोप के आधार पर नहीं, बल्कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। हालांकि, मामले में जांच अभी जारी बताई गई है। इसलिए आगे किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

समिट बिल्डिंग में पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आई शिकायतों में सबसे प्रमुख आरोप यह था कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ दिया गया। इन आरोपों के बाद जांच का दायरा केवल कॉल सेंटर और वहां मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहा। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल कराई। जांच के बाद नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का फैसला लिया गया। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए पैसे लेकर लोगों को छोड़ने के आरोप जांच का विषय रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विभाग ने जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की है और मामले की आगे की जांच जारी है।

समिट बिल्डिंग का मूल मामला कथित साइबर ठगी से जुड़ा है। पुलिस ने जिस कॉल सेंटर पर कार्रवाई की थी, वहां से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर से विदेशों में रहने वाले नागरिकों को निशाना बनाए जाने के आरोप थे। अमेरिका और अन्य देशों के नागरिकों से कथित साइबर ठगी की शिकायतों के बाद पुलिस की कार्रवाई हुई थी। अब इस प्रकरण में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई ने जांच का एक अलग पहलू सामने रखा है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। विभागीय जांच के दौरान यदि किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इससे साफ है कि विभागीय स्तर पर पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच को फिलहाल पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।

समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर सोलारिस सॉल्यूशन नाम से कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कॉल सेंटर पर कार्रवाई की। करीब 12 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चला। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को हिरासत में लिया गया। मामले में दो ऑपरेशन मैनेजर समेत 119 युवक-युवतियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई, जबकि पूरे मामले में 122 लोगों की गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया। इसके बाद कुछ पुलिसकर्मियों पर हिरासत में लिए गए लोगों को कथित तौर पर पैसे लेकर छोड़ने के आरोप लगाए गए। शिकायतों के आधार पर पुलिस अधिकारियों ने विभागीय जांच शुरू कराई। जांच के बाद 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई। इनमें 3 निलंबित और 6 लाइन हाजिर किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और आगे किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई की जा सकती है।

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