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संसद में हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पास, ‘केरलम’ नाम बदलने का बिल भी मंजूर

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया और बाद में वॉकआउट किया; लोकसभा में ‘केरलम’ और सहकारी विकास निगम विधेयक बिना चर्चा ध्वनिमत से पारित हुए।
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Bureau News Desk
11 Aug 2026
07:15 PM
1 min read
संसद में हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पास, ‘केरलम’ नाम बदलने का बिल भी मंजूर
हाइलाइट्स
ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित हुआ।
लोकसभा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी थी।
विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का प्रस्ताव है।
लोकसभा ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को मंजूरी दी।

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का 17वां दिन मंगलवार को विधायी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक टकराव के लिए भी चर्चा में रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों के हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। राज्यसभा ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी। इस तरह विधेयक को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई।

इस विधेयक के जरिए देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का रास्ता साफ होगा। इसी दिन लोकसभा ने भारी हंगामे के बीच केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी ध्वनिमत से पारित कर दिए। दोनों विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए।

संसद के भीतर जारी विरोध का असर परिसर के बाहर भी दिखाई दिया। मकर द्वार के पास सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का अवसर नहीं मिलने पर आपत्ति जताई और बाद में सदन से वॉकआउट किया।

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मंगलवार को राज्यसभा में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश किया और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखा। लोकसभा से यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका था। सरकार के अनुसार विधेयक का उद्देश्य न्यायाधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में बदलाव करना नहीं है। इसका मुख्य जोर अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और पात्रता में एकरूपता लाने पर है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही ‘सुधार एक्सप्रेस’ का हिस्सा बताया। सरकार की ओर से न्यायाधिकरणों के युक्तिकरण की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार वर्ष 2016 में ट्रिब्यूनल के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और वर्ष 2021 में इससे संबंधित कानून लाया गया था। नए कानून के प्रभावी होने के बाद न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को निरस्त करने का प्रावधान है।

ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग शामिल है। आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में प्रस्तावित है। प्रस्तावित आयोग में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होंगे। इनमें दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे। आयोग के अध्यक्ष पद के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पात्र होंगे। प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य न्यायाधिकरण व्यवस्था को मजबूत करना, नियुक्तियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करना और न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद करना है।

आयोग की प्रस्तावित संरचना

  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • सदस्य: चार
  • न्यायिक सदस्य: दो
  • तकनीकी सदस्य: दो
  • मुख्य उद्देश्य: ट्रिब्यूनल व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता तथा पारदर्शिताराज्यसभा में क्यों हुआ विपक्ष का वॉकआउट?

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ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष ने प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने का अवसर नहीं मिलने पर विपक्षी सांसदों ने नाराजगी जाहिर की। इसके बाद इंडिया गठबंधन के सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष के वॉकआउट के बीच सरकार की ओर से विधेयक पर जवाब दिया गया और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले भी मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही हंगामे के कारण दो बार स्थगित हुई थी। दोपहर दो बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

संसद के इसी दिन के कामकाज में केरल के नाम से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक भी लोकसभा से पारित हुआ। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 के जरिए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ किए जाने का प्रस्ताव है। विपक्ष के भारी हंगामे के बीच यह विधेयक बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस और केरल से जुड़े विपक्षी नेताओं की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक के विरोध को लेकर कांग्रेस और केरल के नेताओं पर प्रतिक्रिया दी। केरल का नाम ‘केरलम’ करने का मुद्दा लंबे समय से राज्य की राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। अब संसद में विधेयक पारित होने के बाद इस दिशा में आगे की संवैधानिक प्रक्रिया का रास्ता खुला है।

लोकसभा ने मंगलवार को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दे दी। यह विधेयक गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा पेश किया गया। सरकार के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना और सहकारी समितियों को मजबूत करना है। विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक भी बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया गया। इस तरह लोकसभा में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी मिली—एक राज्य के नाम परिवर्तन से जुड़ा था और दूसरा सहकारी क्षेत्र से संबंधित था।

मंगलवार को संसद में केवल सदन के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। मकर द्वार के बाहर विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को उठाया। विपक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर जवाब और चर्चा की मांग की गई। इसके अलावा विपक्ष ने राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी के आरोपों से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की मांग की। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के सांसदों ने झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी के कारण संसद परिसर में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।

संसद परिसर में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पहुंचने पर भाजपा सांसदों की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से पहले ही मिल चुके हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब संसद के दोनों सदनों में विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार से चर्चा और जवाब की मांग कर रहा था।

मंगलवार की कार्यवाही को देखें तो संसद में एक साथ कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। राज्यसभा ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को पारित किया। लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी। इस विधेयक में न्यायाधिकरणों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग की व्यवस्था प्रस्तावित है। दूसरी ओर लोकसभा ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी। इन विधायी कार्यवाहियों के दौरान विपक्ष का विरोध भी जारी रहा। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया, जबकि लोकसभा में भी विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्षी सांसदों की ओर से हंगामा जारी रहा।

देश में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए कई न्यायाधिकरण काम करते हैं। इन संस्थाओं में नियुक्ति, सदस्यों की पात्रता, कार्यकाल और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग प्रावधान रहे हैं। ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 का प्रमुख फोकस इन व्यवस्थाओं में एकरूपता लाने पर है। प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के जरिए अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को एक केंद्रीय ढांचे के तहत लाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे नियुक्तियों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। विधेयक का उद्देश्य ट्रिब्यूनलों के अधिकार क्षेत्र में बदलाव करना नहीं बताया गया है।

सरकार ने संसद में बताया कि न्यायाधिकरणों के युक्तिकरण की प्रक्रिया वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में इससे संबंधित कानून लाया गया। अब 2026 के प्रस्तावित कानून के जरिए नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नई संरचना तैयार करने का प्रयास किया गया है। इस विधेयक के लागू होने के बाद न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को निरस्त करने का प्रावधान है।

लोकसभा से पारित केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 राज्य के आधिकारिक नाम से संबंधित है। विधेयक के अनुसार राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। नाम परिवर्तन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया के तहत केंद्र और राज्य के स्तर पर विभिन्न चरण पूरे किए गए हैं। लोकसभा में विधेयक का पारित होना इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण संसदीय चरण है।

दिनभर चले हंगामे और विधायी कामकाज के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह मानसून सत्र के 17वें दिन संसद में तीन महत्वपूर्ण विधायी घटनाक्रम सामने आए। राज्यसभा से ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पारित हुआ, जबकि लोकसभा में ‘केरलम’ नाम परिवर्तन और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयक को मंजूरी मिली। इसके साथ ही दोनों सदनों और संसद परिसर में विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक विरोध भी जारी रहा।


 

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