यूपी में फर्जी आधार और पैन से बढ़ रहे रजिस्ट्री घोटाले

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फर्जी आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके रजिस्ट्री घोटाले बढ़ते जा रहे हैं। लखीमपुर, लखनऊ, वाराणसी और अन्य जिलों में जालसाज फर्जी पहचान पत्र लगाकर जमीन हड़प रहे हैं। आयकर विभाग की जांच में नौ जिलों में गलत पैन नंबर और फर्जी आधार कार्ड से रजिस्ट्री कराने के मामले सामने आए हैं।
News Desk 18 Sep 2025, 12:52 AM 1 min read
यूपी में फर्जी आधार और पैन से बढ़ रहे रजिस्ट्री घोटाले


>उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लखनऊ, लखीमपुर, वाराणसी सहित कई जिलों में जालसाज फर्जी आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके जमीन हड़पने लगे हैं। निबंधन विभाग के पास आधार सत्यापन की कोई ठोस प्रक्रिया न होने के कारण फर्जीवाड़े पर नियंत्रण करना मुश्किल साबित हो रहा है।


>आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि नौ जिलों में गलत पैन नंबर और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करके रजिस्ट्री कराई जा रही है। विशेषकर लखनऊ में पिछले एक साल में ही फर्जी आधार कार्ड का उपयोग कर रजिस्ट्री कराने के दो दर्जन मामले दर्ज किए गए हैं। एक उदाहरण वाराणसी जेल में बंद शाइन सिटी के निदेशक अमिताभ श्रीवास्तव का है। जांच में सामने आया कि अमिताभ उस दिन लखनऊ नहीं आए थे, फिर भी किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी ओर से रजिस्ट्री कर दी। इसी तरह, मोहनलालगंज, पीलीभीत, नोएडा, वाराणसी और अन्य जिलों में दर्जनों जमीनें फर्जी तरीके से बेची गई हैं।


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  • मोहनलालगंज का मामला: शारदा तिवारी ने 1980 और 1990 में मृत बैजनाथ और लालता के नाम से फर्जी बैनामा बनवाया। असली मालिक अजय ने जब जमीन बेचने और दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया तो फर्जीवाड़ा सामने आया।

  • पूर्व एसडीएम की पत्नी की जमीन: अप्रैल 2025 में योगिता देवी की जमीन फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई। जानकारी उन्हें तब लगी जब उनके केयर टेकर ने जमीन पर बाउंड्रीवाल बनते देखा।

  • पूर्व आईटीआई अधिकारी की जमीन: चंद्र किशोर पांडेय की जमीन उसी दिन बेची गई जब वह नोएडा में अपने बेटे के पास थे।


>इस तरह के मामले बताते हैं कि न केवल जालसाज बल्कि कभी-कभी अफसरों की मिलीभगत भी फर्जीवाड़े में शामिल होती है।


>शासन ने हाल ही में पैन कार्ड के सत्यापन को अनिवार्य किया है, जिससे रजिस्ट्री में कम से कम पैन की जांच तो हो सके। लेकिन आधार को रजिस्ट्री से लिंक करने की योजना तीन साल पहले सुझाई गई थी और अब तक लागू नहीं हो सकी है।


>पूर्व डीआईजी स्टांप ओपी सिंह का कहना है कि रजिस्ट्री केवल क्रेता-विक्रेता और गवाहों द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों पर होती है। जब तक आधार लिंक नहीं होगा, तब तक जालसाज आसानी से किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा करके रजिस्ट्री करवा सकते हैं। एआइजी स्टांप रमेश कुमार ने कहा कि आधार लिंकिंग की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही सर्वर और सॉफ्टवेयर पर काम पूरा कर इसे लागू किया जाएगा।


>विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक रजिस्ट्री में आधार और पैन दोनों को अनिवार्य रूप से लिंक नहीं किया जाएगा, तब तक फर्जीवाड़ा रोक पाना मुश्किल है। लाखों की जमीनें फर्जीवाड़े के कारण असली मालिकों से छिन रही हैं, जिससे आम जनता में गहरी चिंता व्याप्त है।

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