उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक और वैश्विक रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत राजकीय आईटीआई को हाईटेक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है, ताकि वे देश और विदेश की कंपनियों में रोजगार के लिए तैयार हो सकें। इसके लिए भविष्य की स्किल रणनीति और रोजगार आधारित रोडमैप तैयार किया गया है।
कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉइट ने अपनी कार्य योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रदेश के आईटीआई संस्थानों को आधुनिक मशीनों, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 आधारित तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इसके माध्यम से छात्रों को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि नई तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण से युवाओं के लिए देश और विदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वहीं डेलायट के विशेषज्ञों ने कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक निवेश से सीधे जोड़ने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान भविष्य के रोजगार रुझानों, उद्योगों की मांग और निवेश आधारित रोजगार मॉडल का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसमें सुझाव दिया गया कि स्किल डेवलपमेंट योजनाओं को नई तकनीकों और औद्योगिक निवेश के साथ समन्वित किया जाए, ताकि युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों संस्थाओं की कार्ययोजनाओं और सुझावों को तेजी से लागू किया जाए। बैठक में सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल के जरिए कौशल विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।
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