उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली कटौती की समस्या आम जनता के सब्र का इम्तिहान ले रही है। भीषण गर्मी और अघोषित विद्युत कटौती से त्रस्त जनता अब सड़कों पर नहीं, बल्कि सीधे बिजली दफ्तरों का रुख कर रही है। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस पूरे मसले को हवा दी, जिसमें यूपी के बिजली मंत्री ने जब व्यापारियों ने बिजली कटौती पर सवाल किया, तो समस्या का हल बताने के बजाय "जय श्रीराम" का नारा लगवा कर वहां से निकल लिए।
लेकिन अब जनता ने चुप्पी तोड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ही वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश राज्य पंचायत परिषद के अध्यक्ष राना दिनेश प्रताप सिंह ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। दर्जनों आक्रोशित विद्युत उपभोक्ताओं को लेकर वह बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय पहुंचे और “हिसाब मांगो अभियान” की शुरुआत की।
"हिसाब मांगो" अभियान में अफसरों से तीखे सवाल
राणा दिनेश प्रताप सिंह ने अधिकारियों से पूछा – जब नगर पंचायत क्षेत्र को 18 घंटे बिजली दी जानी चाहिए, तो महज 1-2 घंटे ही आपूर्ति क्यों हो रही है? क्यों अब तक क्षेत्र को स्वतंत्र फीडर से नहीं जोड़ा गया? खुटहन में दो भाइयों की मौत के बाद अब तक अनुसूचित बस्ती में बिजली क्यों बंद है?
उन्होंने लो वोल्टेज, जर्जर तार, टूटी पोल, और रात में इमरजेंसी फॉल्ट के समय कर्मचारियों की अनुपस्थिति जैसे मुद्दों पर सीधे सवाल दागे। उन्होंने यह भी मांग रखी कि जब तक समयबद्ध समाधान और लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे कार्यालय नहीं छोड़ेंगे।
तीन घंटे का घेराव, 11 बिंदुओं पर मिला आश्वासन
लगभग तीन घंटे चले इस अभियान के बाद बिजली अधिकारियों ने 11 बिंदुओं पर लिखित आश्वासन दिया, जिसमें प्रमुख वादे शामिल हैं:
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नगर क्षेत्र को 15 दिन में स्वतंत्र फीडर से जोड़ा जाएगा।
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18 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
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लो वोल्टेज की समस्या को प्राथमिकता पर ठीक किया जाएगा।
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रात के समय इमरजेंसी फॉल्ट निवारण हेतु स्थायी कर्मचारी नियुक्त होंगे।
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सभी 15 वार्डों में विद्युत टीम सभासद के साथ जाकर समस्या समाधान करेगी।
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खुटहन अनुसूचित बस्ती में जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल की जाएगी।
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लापरवाह अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्यवाही की जाएगी।
क्या 'जय श्रीराम' बोलने से आएगी बिजली?
बिजली कटौती को लेकर लोगों में गुस्सा साफ दिख रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग अब सवाल उठा रहे हैं – “क्या जय श्रीराम कहने से बिजली आ जाएगी?”
व्यापारियों का कहना है कि लगातार कटौती से उनका कारोबार चौपट हो रहा है। अब लोग नारे नहीं, समाधान चाहते हैं।
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