>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह मंडल में पशु तस्करों के उत्पात के बाद कुशीनगर पुलिस की पोल खुल गई है। पिपराइच थाना क्षेत्र में नीट की तैयारी कर रहे दीपक गुप्ता की निर्मम हत्या ने प्रदेश सरकार की सख्ती को बढ़ा दिया। जांच में पता चला कि जिले के कई पुलिसकर्मी पशु तस्करों से सांठगांठ में लिप्त थे।
>तत्काल कार्रवाई में कुशीनगर जिले के कसया और तमकुहीराज के दोनों थानाध्यक्ष, छह दरोगा और अन्य चौकी इंचार्ज सहित कुल 25 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया। डीजीपी कार्यालय के आदेश पर इनका प्रशासनिक स्थानांतरण भी किया गया। कसया थानाध्यक्ष अमित शर्मा को विशेष जांच लखनऊ, तमकुहीराज थानाध्यक्ष सुशील शुक्ला को सीआईडी लखनऊ और अन्य दोषियों को विभिन्न प्रशिक्षण एवं मुख्यालयों में तैनात किया गया।
>जांच में प्रथम दृष्टया देवरिया के विक्रांत वीर और कुशीनगर के एसपी संतोष मिश्रा दोषी पाए गए और उन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया। एसटीएफ को बिहार में पकड़े गए पशु तस्कर के पास कुशीनगर पुलिस से संबंधित डायरी मिली, जिसमें उनके प्राइवेट नंबर और महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले।
>नए पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने ज्वाइन करते ही औचक निरीक्षण कर दोषी पुलिसकर्मियों पर लगाम कसी। एएसपी निवेश कटियार ने पुष्टि की कि छह दरोगा और दो थानाध्यक्ष का प्रशासनिक स्थानांतरण कर जनपद से रिलीव करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
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