>उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 60,244 नव नियुक्त पुलिस आरक्षियों की ट्रेनिंग को लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने इसे “पुलिस सुधार का ऐतिहासिक अवसर” करार दिया है। उनका मानना है कि इन युवा आरक्षियों की गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग राज्य की कानून-व्यवस्था को अगले 30 से 40 वर्षों तक सशक्त और संवेदनशील बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
>डीजीपी ने प्रदेशभर के 10 प्रमुख पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों और 102 स्थायी एवं अस्थायी प्रशिक्षण केंद्रों के प्रमुखों के साथ बैठक कर दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर थाने में 25 प्रशिक्षित सिपाही तैनात किए जाएंगे, जिससे थाने स्तर की कार्यप्रणाली में व्यावसायिकता और संवेदनशीलता का नया युग आएगा।
>डीजीपी राजीव कृष्ण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खुद प्रशिक्षणार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा करें और प्रशिक्षण को व्यवहारिकता से जोड़ें। उन्होंने कहा, “यह पुलिस बल में सुधार का एक जीवन में एक बार मिलने वाला मौका है। हमें इसे पूरी गंभीरता और समर्पण से लेना होगा।”
सोशल मीडिया और महिला सुरक्षा पर भी होगा फोकस
>राजीव कृष्ण ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान आरक्षियों को सोशल मीडिया नीति की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। इसकी सॉफ्ट और हार्ड कॉपी दोनों उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, महिला प्रशिक्षण केंद्रों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार विशाखा समिति का गठन भी अनिवार्य रूप से किया जाए।
9 माह की विशेष प्रशिक्षण योजना
>नव नियुक्त सिपाहियों को 9 महीने का आधारभूत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, सामुदायिक पुलिसिंग, नैतिक आचरण, अनुशासन और तकनीकी दक्षता पर विशेष जोर रहेगा। प्रशिक्षण के बाद इन सिपाहियों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात किया जाएगा।
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