>राजधानी लखनऊ में मानसून से पहले की पहली जोरदार बारिश ने नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) की तैयारियों की पोल खोल दी। इंदिरा नगर सेक्टर 18 की सर्विस लेन शुक्रवार को अचानक धंस गई, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और फिर से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
>धंसाव से बना गड्ढा लगभग 2.5 फीट गहरा और 3 फीट चौड़ा है—जो किसी छोटी कार को निगलने के लिए पर्याप्त है। स्थानीय नगर निगम अधिकारी के अनुसार, यह इलाका लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत आता है। हादसे के बाद मौके को बैरिकेडिंग कर दिया गया है ताकि कोई और अनहोनी न हो।
>PWD के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता राजकुमार पिठौरिया ने बताया, “यह सड़क हमारे विभाग की है और जानकारी के मुताबिक, विद्युत विभाग के कार्य के दौरान पानी रिसकर नीचे चला गया जिससे यह धंसाव हुआ।” उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना निरीक्षण के गड्ढे को मलबे से भरने की कोशिश की, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
>स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले भी इस स्थान पर सड़क धंस चुकी है, लेकिन स्थायी मरम्मत कभी नहीं की गई। एक स्थानीय राहगीर ने बताया, “हर बार मिट्टी डाल दी जाती है, लेकिन स्थिति वैसी की वैसी रहती है। बारिश में घर से निकलने में भी डर लगता है।”
>नगर निगम और PWD द्वारा फिलहाल मामले की संयुक्त जांच की जा रही है। इस बीच अपर नगर आयुक्त ललित कुमार ने तत्काल कार्यवाही करते हुए नगर निगम के अधिशासी अभियंता को मौके पर भेजा।
>यह घटना राजधानी में बुनियादी ढांचे की लापरवाही, समन्वय की कमी और वर्षा से पहले की तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। क्या प्रशासन बारिश के पहले ही टेस्ट में फेल हो गया है?
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