>उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों पर काबू पाने और मृत्यु दर कम करने के लिए पुलिस ने नया कदम उठाया है। यातायात नियम सख्त होने के बावजूद हाईवे से लेकर शहरों तक सड़क सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं। इसी को देखते हुए यूपी पुलिस अब सड़क दुर्घटनाओं की जांच के लिए हर थाने में विशेष टीम गठित करने जा रही है।
>यह निर्णय डीजीपी राजीव कृष्ण ने लिया है, जिसके तहत प्रत्येक थाने में 4 से 5 पुलिसकर्मियों की क्रैश इन्वेस्टिगेशन यूनिट तैयार की जाएगी। यह टीम न केवल दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करेगी, बल्कि सड़क डिजाइन, साइन बोर्ड, ट्रैफिक प्रबंधन और वाहनों की फिटनेस जैसी बारीकियों पर भी रिपोर्ट तैयार करेगी।
>डीजीपी ने निर्देश दिया है कि बड़े हादसों में वाहन की फिटनेस, लंबित चालान, ड्राइवर व्यवहार और सड़क इंजीनियरिंग जैसे पहलुओं की भी जांच होगी। पुलिस मुख्यालय स्तर से इन प्रयासों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।
>इस रणनीति के तहत प्रदेश के संवेदनशील जिलों में सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। केंद्र सरकार के जीरो फेटिलिटी डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम और IRAD डेटा के आधार पर लखनऊ, कानपुर, नोएडा, आगरा, प्रयागराज सहित 20 जिलों को एक्सीडेंट कंट्रोल के लिए चुना गया है।
>इन जिलों के सभी थानों में क्रिटिकल दुर्घटना टीम गठित की जाएगी। साथ ही ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर वहां नागरिक पुलिस और ट्रैफिक नियंत्रण को बढ़ाया जाएगा, ताकि सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।
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